देहरादून, जेएनएन। निजी कॉलेजों की मनमानी के खिलाफ आंदोलन कर रहे आयुर्वेद छात्रों के आंदोलन पर अब सियासत का रंग छाने लगा है। शनिवार रात को पुलिस द्वारा छात्रों के साथ की गई बर्बरता के बाद सियासत और तेज हो गई है। कांग्रेस, उक्रांद, महिला मंच व अन्य विपक्षी दलों के तमाम नेता परेड मैदान स्थित धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के आंदोलन का न सिर्फ समर्थन किया, बल्कि सरकार पर भी जमकर बरसे। 

यह आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर ही पुलिस ने शांतिपूर्वक ढंग से आंदोलन कर रहे छात्रों पर दमनात्मक कार्रवाई की है। उन्होंने छात्रों के समर्थन में राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना, लालचंद शर्मा आदि ने पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा की है। कहा कि निजी कॉलेज न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। बावजूद इसके राज्य सरकार मौन है। कारण ये कि कुछ मंत्री व विधायक भी कॉलेजों का संचालन कर रहे हैं। 

वहीं उत्तराखंड क्रांति दल के संरक्षक बीडी रतूड़ी, हरीश पाठक, सुनील ध्यानी, डीके पाल, अशोक नेगी, लताफत हुसैन आदि ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। कहा कि एक तरफ पुलिस ने छात्रों पर बर्बरता की, वहीं दून अस्पताल में भर्ती घायलों को समुचित उपचार नहीं मिल रहा है। एक सोची समझी साजिश के तहत घायल छात्रों को एम्स ऋषिकेश रेफर किया जा रहा था। 

ऐसे में यूकेडी नेताओं ने अस्पताल प्रबंधन पर दवाब बनाकर घायल छात्रों का एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड आदि कराया। कहा कि दल पूरी तरह छात्रों के साथ खड़ा है और जरूरत पडऩे पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। भाजपा नेता व वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान, महिला मंच की संयोजक निर्मला बिष्ट आदि ने भी धरना स्थल पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और पुलिस की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। कहा कि सरकार को छात्रों के भविष्य की कतई चिंता नहीं है।

युवा कांग्रेस ने फूंका  मुख्यमंत्री का पुतला 

निजी आयुष कॉलेजों में मनमाने तरीके से की गई फीस वृद्धि के विरोध में आंदोलन कर रहे आयुर्वेदिक पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं को जबरन उठाए जाने के खिलाफ ऋषिकेश में युवा कांग्रेस ने प्रदेश सरकार का पुतला फूंका। 

हरिद्वार मार्ग पीडब्ल्यूडी तिराहे पर युवा कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान युकां ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर नारेबाजी भी की। युकां के नगर अध्यक्ष अमरजीत सिंह धीमान ने कहा कि राज्य की त्रिवेंद्र रावत सरकार स्वयं को डबल इंजन की सरकार बताती है। मगर, राज्य में छात्रों से लेकर प्रत्येक वर्ग का शोषण किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि राज्य के आयुष कॉलेजों में मनमाने तरीके से भारी फीस वृद्धि कर दी गई है, मगर सरकार चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने कहा कि इस मनमानी के विरोध में लोकतांत्रित तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों को सरकार के इशारे पर प्रशासन ने जबरन उठा दिया और उनपर लाठियां बरसाई। उन्होंने कहा कि यूथ कांग्रेस मारपीट करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करती है। 

इस अवसर पर मिथुन, दीक्षित, विमल शर्मा, मनीष भट्ट, अतुल, राजा पुरोहित, अरुण कुमार, केशव दुबे, आशीष पुंडीर, अंशुल चावला, सुमित शर्मा, विजय कुमार आदि शामिल थे।

पुलिस की बर्बरता का जवाब, तीन और छात्र अनशन पर

पुलिस की बर्बरता के बाद भी आयुर्वेद छात्रों का हौसला नहीं टूटा है और उन्होंने आंदोलन तेज कर दिया है। सरकार के रवैये व पुलिस कार्रवाई के विरोध में तीन छात्र पवन मौर्य, सुशील सेमवाल व रश्मि पाल ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। इसके अलावा कई अन्य कॉलेजों के छात्र भी धरना स्थल पर पहुंचे। गुस्साए छात्रों ने लैंसडौन चौक पर राज्य सरकार का पुतला फूंका। उन्होंने वहां सांकेतिक रूप से कुछ देर जाम भी लगाया।

बता दें, विभिन्न आयुर्वेद कॉलेजों के छात्र-छात्राएं नौ दिन तक हर्रावाला स्थित विवि के गेट पर धरना-प्रदर्शन करते रहे। पिछले दस दिन से वह परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पर निजी कॉलेजों की मनमानी के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। शनिवार शाम सीओ सदर जया बलूनी के नेतृत्व में भारी पुलिस फोर्स धरना स्थल पर पहुंची और अनशनकारी छात्र अजय को बल पूर्वक उठाने लगी। इस दौरान छात्रों व पुलिस के बीच धक्का-मुक्की व खींचतान भी हुई। 

मौके पर भगदड़ भी मच गई। इसमें कई छात्र गिर गए। इनमें चार छात्र ललित तिवारी, शिवम, कुणाल व अजय मौर्य को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शिवम व अजय अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद पुन: धरना-प्रदर्शन में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी छात्रों पर बढ़ा हुआ शुल्क जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। 

यह भी पढ़ें: अनशन पर बैठे आयुष छात्रों की पुलिस के साथ हुई तीखी झड़प

ऐसा नहीं करने पर ना ही छात्रों को पूरक परीक्षा के लिए फॉर्म भरने दिया जा रहा है और ना ही कक्षाओं में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। निजी कालेजों की हठधर्मिता यह कि वह न्यायालय के आदेशों की नाफरमानी कर रहे हैं। आरोप लगाया कि इन कॉलेजों को कहीं न कहीं सरकार का भी पूरा संरक्षण मिला हुआ है। यही वजह कि इतने दिन से आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं की सुध लेने के लिए सरकार का कोई भी नुमाइंदा नहीं पहुंचा है। उस पर पुलिस के माध्यम से आंदोलन को कुचलने का षडयंत्र रचा जा रहा है।

यह भी पढ़ें: आयुर्वेद छात्रों ने मांगी भीख, अनशन पर बैठी छात्र की तबीयत बिगड़ी Dehradun News

Posted By: Bhanu

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप