देहरादून, राज्य ब्यूरो। पुलिस मुख्यालय भी अब परिवहन विभाग के समान ही कंपाउंडिंग के अधिकार चाह रहा है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने शासन को पत्र लिखकर यह अधिकार बढ़ाने को कहा है। इस पर शासन ने परिवहन विभाग से राय मांगी है। इसके बाद ही इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, परिवहन विभाग ने मौखिक तौर पर शासन को यह अवगत करा दिया है कि तकनीकी मामलों में पुलिस को यह अधिकार दिया जाना संभव नहीं है। 

प्रदेश में पुलिस को वर्ष 2016 में छह धाराओं में चालान कर कंपाउंडिंग फीस वसूलने के अधिकार दिए गए थे। इनमें बिना नंबर प्लेट के वाहन चलाना, बिना हेलमेट के वाहन चलाना, एक्ट में दिए गए निर्देशों का पालन न करना, गलत सूचना देना अथवा तथ्य छिपाना, खतरनाक तरीके से वाहन चलाना अथवा वाहन चलाते हुए मोबाइल का प्रयोग करना, शारीरिक अथवा मानसिक रूप से अस्वस्थ होने पर वाहन चलाना और बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाना आदि शामिल हैं। इससे होने वाले राजस्व को पुलिस कोषागार में जमा करती है। 
इस बीच हाल ही में प्रदेश में संशोधित मोटरयान अधिनियम लागू किया गया है। इसमें चालान की कई नई धाराओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही कंपाउंडिंग की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है। इसे देखते हुए पुलिस भी बेहतर यातायात व्यवस्था और यातायात के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए परिवहन विभाग के सामान ही मोटरयान अधिनियम की धाराओं में कंपाउंडिंग के अधिकार चाह रही है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय से शासन को पत्र भेजा गया है। बीते वर्ष पुलिस ने सीमित धाराओं पर कंपाउंडिंग का अधिकार होने के बावजूद परिवहन विभाग से ज्यादा राजस्व वसूला था। इस पत्र पर सचिव परिवहन ने अधिकारियों संग एक औपचारिक बैठक भी की है।
सूत्रों की मानें तो इस बैठक में परिवहन विभाग के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि ओवरलोडिंग और तकनीकी खराबी वाले मामलों में पुलिस को कंपाउंडिंग का अधिकार नहीं दिया जा सकता। कारण यह कि पुलिस के पास तकनीकी दक्षता के अधिकारी नहीं है। परिवहन विभाग के पास विशेषज्ञता होने के कारण ही वह इस तरह के चालान काट सकता है। अब इस संबंध में जल्द ही अधिकारिक बैठक होगी, जिसमें इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
 

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