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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 21, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कूड़े के पहाड़ पर शीशमबाड़ा, पीसीबी ने भेजा नोटिस Dehradun News

By Sunil NegiEdited By:
Published: Tue, 21 Jan 2020 08:36 AM (IST)

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने शीशमबाड़ा प्लांट का संचालन कर रही कंपनी को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने को कहा है।

कूड़े के पहाड़ पर शीशमबाड़ा, पीसीबी ने भेजा नोटिस Dehradun News
कूड़े के पहाड़ पर शीशमबाड़ा, पीसीबी ने भेजा नोटिस Dehradun News

देहरादून, सुमन सेमवाल। शीशमबाड़ा में कूड़े का निस्तारण कितना हो पा रहा है, इसका अंदाजा वैसे तो कूड़े के पहाड़ और दूर-दूर तक फैलती दरुगध से लगाया जा सकता है। लेकिन, अब पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में भी स्पष्ट हो चुका है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसाइक्लिंग प्लांट से पर्यावरण की नई दुश्वारियां बढ़ गई हैं। प्लांट में कूड़ा प्रबंधन मानकों के अनुरूप न होने के चलते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने प्लांट का संचालन कर रही कंपनी को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने को कहा है।

हाल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने शीशमबाड़ा प्लांट में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्थाओं की जांच की थी। इसमें पाया गया था कि कूड़े का पृथककरण तक ढंग से नहीं किया जा रहा। इससे निकलने वाले लिचेट (दुर्गंध युक्त गंदगी) का निस्तारण भी उचित माध्यम से नहीं किया जा रहा था। इससे पास की नदी में भी जहरीले पानी की निकासी हो रही है। 

दुर्गंध रोकने के लिए भी समुचित उपायों का अभाव पाया गया। इसके साथ ही प्लांट की अव्यवस्थाओं से हो रही पर्यावरणीय क्षति का भी आकलन किया गया। इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय ने प्लांट के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति बोर्ड मुख्यालय को भेज दी।

अब इस संस्तुति पर कार्रवाई करते हुए बोर्ड मुख्यालय की ओर से जारी नोटिस में रैमकी कंपनी को पर्यावरणीय क्षति लगाने की बात भी कही गई है। जिसका जवाब रैमकी कंपनी को 15 दिन के भीतर देना होगा।

 उत्तर संतोषजनक न पाए जाने पर कंपनी पर जुर्माना लगा दिया जाएगा। इसी 15 दिन की अवधि में कंपनी को प्लांट की सभी व्यवस्थाएं नियमों के अनुरूप करनी होंगी। ऐसा न कर पाने पर कंपनी के खिलाफ विधिक व प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

लोगों ने किया प्रदर्शन, प्लांट बंद करने की मांग

शीशमबाड़ा प्लांट से उठ रही दुर्गंध और गंदगी को लेकर क्षेत्रवासियों का विरोध सोमवार को चरम पर पहुंच गया। लोगों ने न सिर्फ बोर्ड के नेहरू कॉलोनी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में प्रदर्शन किया, बल्कि क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल को करीब दो घंटे तक उनके कार्यालय में बंधक बनाए रखा। बोर्ड कार्यालय पहुंचे लोगों ने कहा कि प्लांट की अव्यवस्थाओं के कारण उनका जीवन दुश्वार हो गया है। चौबीसों घंटे पूरे इलाके की हवा में दुर्गंध रहती है। 

गंदगी के चलते आए दिन लोग बीमार पड़ रहे हैं और उन्हें ढंग से नींद भी नहीं आती। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी कि शीघ्र प्लांट को बंद नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे। वहीं, क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल ने कहा कि प्लांट के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति बोर्ड मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। अब आगे की कार्रवाई मुख्यालय स्तर से ही की जानी है। इसके बाद लोग शांत होकर वापस लौटे। 

लीचेट बहाव: लीचेट यानी दरुगधयुक्त गंदे पानी के निस्तारण के लिए लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट (एलटीपी) बनाया गया है। लेकिन, यह पूरे परिसर में खुले में बहता रहता है। साथ ही पाया गया कि एलटीपी 15 दिन से बंद है और इसके लिए आरसीसी पिट बनाया गया है। यह पिट भी ओवरफ्लो पाया गया। इससे भूजल के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है।

हैंडपंपों का पानी दूषित: प्लांट परिसर में लगाए गए हैंडपंपों के पानी के नमूने लिए गए। जिनकी जांच में पाया गया कि पानी की गुणवत्ता खराब हो चुकी है। 

हवा की गुणवत्ता: प्लांट क्षेत्र में बेहद अधिक दुर्गंध पाई गई। जिसका यह मतलब हुआ कि इसकी रोकथाम के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए जा रहे।

प्लांट की जांच के बाद बोर्ड की आख्या

लीचेट शुद्धिकरण: जांच टीम ने पाया कि प्लांट से निकलने वाले लीचेट के शुद्धिकरण की व्यवस्था नहीं है। हालांकि, प्लांट प्रबंधकों की तरफ से बताया गया कि शुद्धिकरण के लिए मल्टी इफेक्टिव एवैपोरेटर एंड सकरुलर डिस्क रिवर्स ऑस्मोसिस लगाए जाने की प्रक्रिया गतिमान है।

बोर्ड ने एनओसी का आवेदन किया निरस्त

शीशमबाड़ा प्लांट की एनओसी अगस्त 2019 में समाप्त हो चुकी है। इसके बाद रैमकी ने एनओसी के लिए आवेदन किया तो बोर्ड ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि व्यवस्था नियमों के अनुरूप नहीं चल रही। इसी क्रम में प्लांट की जांच की गई।

20 हजार मीटिक टन नॉन-डिग्रेडेबल कूड़ा डंप

प्लांट में लगभग 20 हजार मीटिक टन नॉन-डिग्रेडेबल कूड़ा जमा है। यह कूड़ा स्वत: नहीं सड़ता बल्कि विशेष माध्यम से निस्तारित किया जाता है। इस तरह का कूड़ा जितना ज्यादा डंप रहेगा, पर्यावरण को उतना ही अधिक नुकसान होगा।

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 नगर निगम हर माह रैमकी को दे रहा 92 लाख रुपये

नगर निगम कूड़ा उठान से लेकर उसकी रिसाइक्लिंग के लिए रैमकी कंपनी को हर माह 92 लाख रुपये दे रहा है। इसके बाद भी न तो कूड़े का ढंग से उठान हो पा रहा है, न ही उसका उचित निस्तारण।

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