देहरादून, जेएनएन। कोरोना संक्रमण के लिहाज से प्रदेश में दिन-प्रतिदिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कोरोना का कहर थमने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। मैदान हो या फिर पहाड़ सभी जगह संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्थिति यह कि मरीजों का पहला सैकड़ा पूरा होने में जहां 65 दिन का समय लगा, यह अवधि अब एक से दो दिन तक सिमट गई है। अब एक से दो दिन में सौ नए मरीज जुड़ते चले जा रहे हैं।

देश के विभिन्न राज्यों से लौटे प्रवासियों ने न सिर्फ प्रदेश में इस बीमारी का बोझ बढ़ा दिया है, बल्कि पिछले कुछ वक्त तक सुकून महसूस कर रहे आमजन को भी दहशत में डाल दिया है। यूं कहा जा सकता है कि प्रदेश में अब तक कोरोना संक्रमण के छह सौ से अधिक जो मामले सामने आए हैं उनमें 80 फीसद से अधिक प्रवासी हैं। चिंता की बात यह भी कि एक वक्त तक कोरोना मुक्त रहे प्रदेश के पर्वतीय जिले भी अब इस चुनौती से जूझ रहे हैं। यहा हर दिन मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।

स्थिति यह है कि कुछ समय पहले तक कोरोना के खिलाफ छिड़ी जंग में जीत के करीब पहुंच चुका राज्य फिर मुसीबतों से घिर गया है। राष्ट्रीय औसत से कई गुना बेहतर रिकवरी रेट, डबलिंग रेट, न्यूनतम मृत्यु दर आदि तथ्यों को लेकर महकमों के अधिकारी जहा खुद की पीठ थपथपाते नजर आते थे, वहीं अब दिनोंदिन स्थिति गंभीर होती जा रही है। जहां एक तरफ कोरोना संक्रमण दर तीन फीसद के करीब पहुंचने को है। वहीं मरीजों की दोगुना होने की दर और रिकवरी रेट भी तेजी से नीचे गिर रहा है। 

एक नजर

  • 15 मार्च पहला मामला 
  • 19 मई पहला सैकड़ा (65 दिन) 
  • 23 मई दूसरा सैकड़ा (चार दिन) 
  • 24 मई तीसरा सैकड़ा (एक दिन) 
  • 26 मई चौथा सैकड़ा (दो दिन) 
  • 28 मई पांचवां सैकड़ा (दो दिन) 
  • 29 मई छठा सैकड़ा (एक दिन)

पहाड़ में बढ़ रही कोरोना की रफ्तार

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कोरोना की रफ्तार अब बढ़ती जा रही है। वर्तामन समय में 30 फीसदी मरीज उन नौ पर्वतीय जिलों से हैं जो एक वक्त पर कोरोना मुक्त रहे हैं। चिंताजनक पहलू यह कि प्रवासियों की आमद के साथ बढ़ता बीमारी का बोझ सबसे ज्यादा टिहरी जनपद पर पड़ा है। इसके अलावा अल्मोड़ा में भी मामले तेजी से बढ़े हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि लॉकडाउन-3 से पहले तक उत्तराखंड के चार जिले देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल व ऊधमसिंहनगर ही सर्वाधिक प्रभावित थे।

पौड़ी व अल्मोड़ा में बस एक-एक मामला ही आया था। जबकि सात अन्य जनपदों में एक भी मामला नहीं था। पर अभी की स्थिति में टिहरी यूएसनगर व हरिद्वार को पीछे छोड़ मरीजों की संख्या के लिहाज से तीसरे नंबर पर आ गया है। यहां कोरोना के 70 मामले हैं। यह कुल मामलों का दस फीसद है। 

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अगर नौ पर्वतीय जिलों की स्थिति का आकलन करें तो 32 फीसदी मामले अकेले टिहरी में हैं। एकमात्र मरीज के ठीक होने के बाद अल्मोड़ा के कोरोना मुक्त हो जाने का सुकून भी ज्यादा वक्त नहीं रहा। यहां भी आंकड़ा बढ़ते-बढ़ते 45 पहुंच गया है। पौड़ी, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर व अन्य जिलों की भी तस्वीर बहुत तेजी से बदली है। जिम्मेदार यह दावा कर रहे हैं जिस तरह संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है उसी अनुपात में अस्पतालों में भी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। पर यह मानना पड़ेगी कि चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।

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