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    बारिश व हिमपात न होने से विदेशी परिंदों के प्रवास पर पड़ा असर, आसन नमभूमि में इन प्रजातियों के परिंदे करते हैं प्रवास

    इस सीजन में अभी तक बारिश व हिमपात न होने का असर विदेशी परिंदों के प्रवास पर भी पड़ा है। मौसम खुष्क होने के चलते वर्तमान में देश के पहले कंजरवेशन रिजर्व व उत्तराखंड के पहले रामसर साइट आसन नमभूमि में मात्र 17 प्रजातियों के परिंदे ही प्रवास पर पहुंचे।

    By Sumit KumarEdited By: Updated: Wed, 24 Nov 2021 08:11 PM (IST)
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    मौसम खुष्क होने के चलते रामसर साइट आसन नमभूमि में मात्र 17 प्रजातियों के परिंदे ही प्रवास पर पहुंचे हैं।

    जागरण संवाददाता, विकासनगर : इस सीजन में अभी तक बारिश व हिमपात न होने का असर विदेशी परिंदों के प्रवास पर भी पड़ा है। पिछले साल नवंबर के अंत तक करीब 40 प्रजातियों के परिंदे प्रवास पर पहुंच चुके थे, लेकिन मौसम खुष्क होने के चलते वर्तमान में देश के पहले कंजरवेशन रिजर्व व उत्तराखंड के पहले रामसर साइट आसन नमभूमि में मात्र 17 प्रजातियों के परिंदे ही प्रवास पर पहुंचे हैं। वर्तमान में रामसर साइट आसन नमभूमि में रेड कैप्टड आइबीज, गैडवाल, यूरेशियन विजन, टफ्ड डक, रुडी शेलडक, कामन कूट, नार्दन शावलर, कामन पोचार्ड, ग्रे हेरोन, ग्रेट कारमोरेंट, लिटिल ग्रेब, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, फेरीजिनियस डक, नार्दन पिनटेल, मलार्ड, नोब बिल्ड डक, कामन टील के परिंदे उत्तराखंड के मेहमान बने हुए हैं।

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    मौसम की बेरुखी की वजह से अभी तक न बारिश हुई है और न ही पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात हुआ है। जिस कारण प्रवासी परिंदों के प्रवास पर मौसम का असर पड़ रहा है। प्रजातियों के करीब चार हजार परिंदों के वर्तमान में मौजूद होने के कारण नमभूमि क्षेत्र में कलरव तो बढ़ा है, लेकिन अन्य प्रजातियों के परिंदों के अभी तक प्रवास पर न आने से पक्षी प्रेमी भी मायूस हैं। खास बात यह है कि आसन नमभूमि में प्रवासी परिंदों के आने से जीएमवीएन के आसन रिसोर्ट की आय भी बढ़ती है, क्योंकि रंग बिरंगे पंखों वाले प्रवासी परिंदों विशेषकर सोने से दमखते पंखों वाले सुर्खाब को देखने का आनंद पर्यटक बोटिंग के दौरान उठाते हैं और परिंदों की आकर्षक गतिविधियां कैमरे में कैद करते हैं। आसन रेंजर राजेंद्र सिंह हिंग्वाण व वन दारोगा प्रदीप सक्सेना के अनुसार अभी मौसम खुष्क है। बारिश व पर्वतीय इलाकों में हिमपात होने पर ठंड में इजाफा होने पर परिंदों की प्रजातियों में इजाफा होगा। पिछले साल नवंबर में चकराता क्षेत्र में हिमपात हुआ था।

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    ये होता है वेटलैंड

    पानी से संतृप्त भू-भाग को वेटलैंड कहा जाता है। रामसर अभिसमय में स्वीकार की गई परिभाषा में आद्रभूमि ऐसा स्थान होता है, जहां पर वर्ष में कम से कम आठ माह पानी भरा रहता है। वैश्विक स्तर पर वर्तमान में कुल 1929 से अधिक आद्र भूमियां हैं। जैवविविधता की दृष्टि से आद्र भूमि अत्यंत संवेदनशील होती हैं। विशेष प्रकार की वनस्पतियां ही आद्रभूमि में उगने और फलने-फूलने के लिए अनुकूल होती हैं।

    आसन नमभूमि में इन प्रजातियों के परिंदे करते हैं प्रवास

    आसन रामसर साइट में रुडी शेलडक, कामन शेलडक, मलार्ड, नार्थन पिनटेल, कामन टील, स्पाट बिल डक, कामन पोचार्ड, टफ्ड पोचार्ड, यूरेशियन विजन, गैडवाल, नार्दन शावलर, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, वूली नेक्टड, ब्लैक आइबीज नया नाम रेड कैप्ट आइबीज, प्लास फिश ईगल, ग्रे लेग गूज, गैडवाल, इरोशियन विजन, टफ्ड डक, पर्पल स्वेप हेन, कामन मोरहेन, कामन कूट, रुडी शेलडक यानि सुर्खाब, लिटिल ग्रेब, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रेब, ग्रेट कारमोरेंट, लिटिल कारमोरेंट, इंडियन सैग, व्हाइट बिल्ड हेरोन, मीडियन इग्रेट, ब्लैक विंग्ड स्किल्ड, रीवर लोपविंग, व्हाइट थ्रोटेड किंगफिशर, पाइज्ड किंगफिशर, ब्लैक हेडेड गल, इरोशियन मार्क हेरियर, येलो बिटर्न, ब्लैक बिटर्न, पेंटेड स्ट्रोक, एशियन ओपन बिल, ब्लैक स्ट्रोक, लिटिल ग्रेब, डारटर, लिटिल कोरमोरेंट, लिटिल इ ग्रेट, ग्रे हेरोन, पर्पल हेरोन, कामन किंगफिशर आदि प्रजातियों के परिंदे प्रवास पर आते हैं।

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