देहरादून, रविंद्र बड़थ्वाल। नमो यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बाबा केदार के प्रति अगाध श्रद्धा और भक्ति आखिरकार उन्हें बाबा के दर पर खींच ही लाई। मोदी आज देश में सत्ता के जिस शीर्ष पद पर बैठे हैं, उसके लिए कहीं न कहीं वर्षों पहले केदारनाथ धाम में की गई तपस्या के प्रतिफल में उन्हें आशीर्वाद मिलता रहा है।  

अब जब देश में सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव के लिए सातवें और आखिरी चरण का निर्णायक मतदान रविवार को है, ऐसे में मतदान से ठीक एक दिन पहले मोदी के बाबा केदारनाथ और फिर अगले दिन भगवान बदरीविशाल के शरणागत होने को उनकी आस्था भले ही माना जाए, लेकिन इसके पीछे राजनीतिक विश्लेषक शैव और वैष्णव उपासकों के बड़े मतदाता वर्गों का भरोसा जीतने के सियासी निहितार्थों से इन्कार नहीं कर रहे हैं। संकेतों और प्रतीकों की सियासत के माहिर नमो ने ढाई माह लंबे और थकाऊ चुनाव कार्यक्रम के आखिरी क्षणों में शांत होकर नई आध्यात्मिक ऊर्जा और ध्यान योग से लक्ष्य साधकर अपनी अगली पारी के संकेत दे दिए हैं। 

देवों के देव महादेव के प्रति नमो की आस्था जगजाहिर है। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी से अपनी राष्ट्रीय राजनीति की पारी शुरू की थी। पिछले चुनाव में मिले प्रचंड बहुमत के बाद पांच साल तक बढ़े आत्म विश्वास के साथ प्रधानमंत्री पद का दायित्व निभा रहे मोदी अपनी नई पारी के लिए मौजूदा चुनाव में मजबूती से खम ठोक रहे हैं। शीर्ष पद की जिम्मेदारी के साथ मोदी मौका मिलने पर गाहे-बगाहे बाबा केदार के धाम आने के लिए समय निकालते रहे हैं। 

केदारनाथ का उनका यह चौथा दौरा है। इससे पहले वह तीन मई, 2017, 20 अक्टूबर, 2017 और सात नवंबर, 2018 को दीपावली पर्व पर बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। 

अब लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर अपने आराध्य बाबा केदार के दर्शनों के लिए पहुंचे। मोदी खुद फिर काशी से चुनाव मैदान में हैं। आखिरी चरण में देश की जिन 59 लोकसभा सीटों के लिए मतदान होना है, उनमें काशी भी शामिल है। 

अपने करीब ढाई माह के चुनावी कार्यक्रम के दौरान मोदी काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं। अब चुनाव के अंतिम चरण से ऐन पहले शनिवार को मोदी ने 11वें ज्योतिर्लिंग बाबा केदार का आशीर्वाद लिया। इस दौरान वह पहाड़ी पहनावे के साथ भगवा रंग का साफा कमर पर बांधे रहे। रविवार को बंगाल, बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत देश के जिस हिस्से में मतदान होना है, उसका बड़ा हिस्सा शैव और वैष्णव उपासकों का है। बंगाल से इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा दोनों को ही कुछ ज्यादा ही आस बंधी है। राजनीतिक विश्लेषक भी मान रहे हैं कि अपनी छवि के बूते देशभर में भाजपा और एनडीए के चुनाव प्रचार की कमान संभाले रहे मोदी छठे चरण के मतदान और सातवें चरण के चुनाव प्रचार के बाद ज्यादा आश्वस्त दिख रहे हैं। 

पहले दिन केदारनाथ और फिर दूसरे दिन यानी रविवार को भगवान बदरीनाथ के दर्शनों के लिए निकले मोदी उत्तराखंड के तीर्थ धामों की अपनी दो दिनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान अगली सियासी पारी को लेकर उनकी निश्चिंतता उनके सहयोगियों और विरोधियों के लिए स्पष्ट संकेत के तौर पर देखी जा रही है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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