देहरादून, जेएनएन। गंगा स्वच्छता को लेकर अनशन कर रहे हरिद्वार मातृ सदन के लापता संत गोपालदास आंध्र प्रदेश में सकुशल हैं। उनके नजदीकी मित्र जयपुर निवासी आचार्य रवींद्र ने उनके संग फोन पर हुई बातचीत के आधार पर इसकी सूचना उत्तराखंड पुलिस को दी है। बता दें कि संत गोपालदास को अनशन से उठाकर पुलिस ने एम्स ऋषिकेश और फिर दिल्ली में उपचार के बाद दून अस्पताल देहरादून में भर्ती कराया था। बीती पांच दिसंबर की देर शाम वह रहस्यमय अंदाज में अस्पताल से लापता हो गए थे। उनकी गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस तलाश में जुटी हुई थी। एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) अशोक कुमार ने लापता संत के सकुशल होने की पुष्टि की है।

निर्मल गंगा अविरल गंगा को लेकर संत गोपालदास आंदोलनरत थे। नवंबर में जब अनशन के दौरान उनकी तबीयत खराब हुई तो जिला प्रशासन ने उन्हें जबरन ऋषिकेश एम्स में भर्ती करा दिया। वहां से उन्हें नई दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया। गत पांच दिसंबर को चिकित्सकों ने उन्हें रेफर करते हुए दून अस्पताल भेज दिया। उन्हें दोपहर लगभग एक बजे दून अस्पताल लाया गया, जहां से देर शाम वे गायब हो गए। इसकी सीसीटीवी फुटेज अस्तपाल में है। बताया गया था कि भर्ती होने के बाद गोपालदास ने एलोपैथी इलाज से मना कर दिया था। 

संत गोपालदास के गायब होने की सूचना पर पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया था। संत गोपालदास को उनके मातृ सदन हरिद्वार में भी तलाशा गया। वहीं, इस बीच संत गोपालदास की मां ने भी उनके गायब होने के पीछे षडय़ंत्र होने का आरोप लगा जांच की मांग की। घटना के विरोध और संत की तलाश के लिए ऋषिकेश, हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन हुए। 

पिछले पांच साल से गोपालदास भूख हड़ताल पर हैं। पुलिस उनकी तलाश कर ही रही थी कि उनके करीबी मित्र रवींद्र ने उनके आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में सकुशल होने की सूचना दे दी। रवींद्र ने पुलिस को बताया कि करीब छह-सात दिन पूर्व गोपालदास ने उन्हें मोबाइल फोन एवं व्हाट्सअप पर कॉल किया था। उस वक्त संत गोपालदास विशाखापट्टनम में थे और विजयवाड़ा के लिए निकल रहे थे। गोपालदास ने ही उन्हें बताया था कि वे ट्रेन से यहां तक आए हैं और फिलहाल यहीं रहेंगे। 

डेढ़ दिन कहां रहे गोपालदास

आशंका है कि संत गोपालदास सात दिसंबर को दून से रवाना मदुरई एक्सप्रेस ट्रेन से विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश पहुंचे। वे वहां से विशाखापट्टनम गए और उसके बाद वापस विजयवाड़ा। सवाल उठ रहा कि फिर गोपालदास पांच दिसंबर की रात व छह दिसंबर को कहां रहे। दरअसल, मदुरई एक्सप्रेस दून से सप्ताह में केवल दो दिन सोमवार और शुक्रवार को रवाना होती है। यही एक अकेली ट्रेन है जो दून से विजयवाड़ा तक सीधी जाती है। संदेह है कि संत डेढ़ दिन दून में ही छिपे रहे या फिर हरिद्वार में रहे और वहीं से मदुरई एक्सप्रेस पकड़ी।

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Edited By: Sunil Negi