राज्य ब्यूरो, देहरादून: शासन ने नदियों में मलबा, सिल्ट और आरबीएम (रिवर बेड मैटिरियल) के जमा होने से नदी तट में कटाव व आबादी की जान माल के नुकसान की आशंका को देखते हुए नदी से मलबा निकालने को रिवर ड्रेजिंग नीति जारी की है। इसके तहत नदी की सतह से तीन मीटर तक मलबा निकाला जा सकेगा। इसके लिए जेसीबी और पोकलैंड का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

प्रदेश में अभी तक राज्य के नदी तल के ऐसे क्षेत्र, जिनमें चुगान के लिए स्वीकृति नहीं दी गई है, उनमें मलबा निकालने के लिए रिवर ट्रेनिंग नीति लागू थी। अब इस नीति में बदलाव करते हुए इसके स्थान पर रिवर ड्रेजिंग नीति लागू कर दी गई है। इस नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसी नदी, गदेरे अथवा नहर, जिनमें मलबा, आरबीएम अथवा सिल्ट की मात्रा बहुत अधिक है, का आकलन करने के लिए सभी जिलाधिकारी उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करेंगे। यह समिति ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित करते हुए इसकी जानकारी जिलाधिकारी को देगी। जिलाधिकारी द्वारा समिति द्वारा चिह्नित स्थलों से मलबा, आरबीएम और सिल्ट हटाने के लिए इच्छुक व्यक्तियों अथवा संस्थाओं से आवेदन प्राप्त करने के लिए खुली नीलामी की विज्ञप्ति जारी की जाएगी।

आवेदन करने वाले का राज्य का मूल निवासी होना आवश्यक है। आवेदन का यह कार्य जिलाधिकारी 15 नवंबर तक पूरा करेंगे। अनुमति देने की कार्यवाही 30 दिसंबर तक पूरी कर ली जाएगी। यह अनुमति छह माह के लिए होगी और मलबा निकालने का कार्य आदेश जारी होने के पश्चात अधिकतम 30 जून तक पूरा करा लिया जाएगा। मलबा दोनों किनारों से एक चौथाई भाग और पुल से 100 मीटर दूरी से निकाला जाएगा। राष्ट्रीय महत्व की सरकारी परियोजनाओं के निर्माण कार्य वाले क्षेत्रों में यह कार्य सरकारी कार्यदायी संस्थाओं अथवा उनके अनुबंधित या अधिकृत ठेकेदारों के आवेदन करने पर दिया जा सकेगा। एक ही क्षेत्र में एक से अधिक परियोजना होने की स्थिति में सरकारी कार्यदायी संस्थाओं के अनुबंधित अथवा अधिकृत ठेकेदारों को ड्रेजिंग कार्य की अनुमति प्रदान की जाएगी।

खनिज के भंडारण व परिवहन को भी नियमावली जारी

शासन ने खनिजों के भंडारण व परिवहन के लिए भी उत्तराखंड खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का निवारण) नियमावली 2021 जारी कर दी है। इसमें यह कहा गया है कि खनन पट्टाधारक, खनन अनुज्ञा पत्र धारक, स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट धारक बिना पास के खनन का परिवहन नहीं करेंगे। ऐसा करने पर न्यूनतम पांच हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। बिना अनुमति के जेसीबी का इस्तेमाल करने पर दो लाख और पोकलैंड मशीन का इस्तेमाल करने पर चार लाख तक का जुर्माना किया जाएगा। इसके साथ ही भंडारण के लिए नदी से दूरी भी तय की गई है। पर्वतीय क्षेत्र में बरसाती नदी से दूरी 25 मीटर और सदानीरा नदियों से 50 मीटर रहेगी। वहीं मैदानी क्षेत्र में बरसाती नदियों से भंडारण की दूरी 50 मीटर और सदानीरा नदी से इनकी दूरी 500 मीटर होगी।

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Edited By: Sunil Negi