देहरादून, [जेएनएन]: करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक बदरीनाथ धाम की आरती को लेकर नया तथ्य सामने आया है। अब तक जिस आरती के रचियता बदरुद्दीन नाम के मुस्लिम व्यक्ति को माना जाता था, उस पर रुद्रप्रयाग के सतेरा स्यूपुरी पट्टी के विजराणा निवासी महेंद्र बर्तवाल ने अपने परदादा स्व. धन सिंह बर्तवाल का दावा पेश किया है। उनकी ओर से मुहैया कराई गई पांडुलिपि की प्रति सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर को भेजी गई है।

पांडुलिपि की प्रतिलिपि उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट को प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने इसे सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर को भेज दिया। सचिव पर्यटन ने कहा कि सबसे पहले पांडुलिपि को डिजिटाइज किया जाएगा, ताकि इसे सुरक्षित रखा जा सके। साथ ही इसकी कार्बन डेटिंग कराकर इसकी रचना की अवधि जानी जाएगी। 

उन्होंने कहा कि इस दिशा में जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को पांडुलिपि की मूल प्रति प्राप्त करने के निर्देश दिए जाएंगे। यदि धन सिंह बर्तवाल की पांडुलिपि सबसे पहली और मूल पाई गई तो इतिहास के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी। 

आरती को लेकर स्थापित व नवीन तथ्य

अब तक यह माना जाता है कि बदरीनाथ धाम में जिस आरती का पाठ किया जाता है, उसकी रचना चमोली जिले के नंदप्रयाग निवासी बदरूद्दीन ने करीब 150 वर्ष पहले की। इसके पदों के अंश कुछ इस तरह हैं। 

'पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम् ।

निकट गंगा बहत निर्मल बदरीनाथ विश्वंभरम, श्री बदरीनाथ विश्वंभरम ।।

शेष सुमरिन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम 

वेद ब्रहमा करत स्तुति श्री बदरीनाथ विश्वंभरम, श्री बदरीनाथ विश्वंभरम।।

दूसरी तरफ धन सिंह बत्र्वाल की आरती की पांडुलिपि भी लगभग उतनी ही पुरानी बताई जा रही है। यह 11 पदों की आरती है, जो कि प्रचलित आरती से चार पद अधिक है। हालांकि आरती में समानता है, लेकिन संयोजन में अंतर नजर आता है।

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Posted By: Bhanu