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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 18, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

India China LAC Border Dispute: चीन से लड़ चुके लांस नायक बलवंत बोले, 1962 वाला भारत समझने की न करे भूल

By Bhanu Prakash SharmaEdited By:
Published: Thu, 18 Jun 2020 12:27 PM (IST)Updated: Thu, 18 Jun 2020 05:22 PM (IST)

1962 में भारत-चीन युद्ध में चौथी गढ़वाल के बैनर तले चीन से लड़ चुके लांसनायक बलवंत सिंह बिष्ट आज चीन ...और पढ़ें

India China LAC Border Dispute: चीन से लड़ चुके लांस नायक बलवंत बोले, 1962 वाला भारत समझने की न करे भूल
India China LAC Border Dispute: चीन से लड़ चुके लांस नायक बलवंत बोले, 1962 वाला भारत समझने की न करे भूल

देहरादून, जेएनएन। चीन के साथ जब भी विवाद होता है तो 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध का जिक्र भी आता है। 58 साल पहले हुए इस युद्ध में कमजोर संसाधनों के कारण हुई हार का मलाल अब भी भारतीय सैनिकों के जेहन में जिंदा है। लेकिन, इसमें भी कोई दो राय नहीं कि सीमित हथियार और संख्या बल कम होने के बाद भी तब भारतीय सेना ने चीन को छठी का दूध याद दिला दिया था।

गढ़वाल राइफल की चौथी बटालियन के जवानों ने जिस अदम्य साहस के साथ चीनी सैनिकों को मुहंतोड़ जवाब दिया था, वह वीरगाथा सैन्य इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इस बटालियन को वर्ष 1962 के युद्ध में दो महावीर चक्र मिले थे। 

इसी युद्ध में चौथी गढ़वाल के बैनर तले चीन से लड़ चुके लांसनायक बलवंत सिंह बिष्ट आज चीन के धोखे और विश्वासघात से आहत हैं। युद्ध के बाद चीन में युद्धबंदी रहे बलवंत सिंह बिष्ट मूल रूप से चमोली के सीमांत गांव घेस के रहने वाले हैं। 80 वर्ष के हो चुके बिष्ट कहते हैं कि अब उम्र इजाजत नहीं देती। शारीरिक रूप से फिट होता तो सेना से कहता हमें बुलाओ, हम सिखाएंगे इस धोखेबाज को सबक। 

वह काफी वक्त से इस घटनाक्रम पर नजर बनाए थे, पर उन्हें लग रहा था कि अब चीन 1962 जैसी हरकत नहीं करेगा। लेकिन, उसने फिर वही चरित्र दिखाया। चीन के साथ साढ़े पांच दशक पहले हुए युद्ध को याद करते हुए बलवंत सिंह बिष्ट कहते हैं कि तब हमारे पास अच्छे हथियार नहीं थे। चीन के सैनिक संख्या में भी बहुत ज्यादा थे। 

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हमें मोर्टार गन व अन्य हथियार कंधे पर लादकर ले जाने पड़ते थे। लेकिन, अब हमारे पास दुनिया के बेहतरीन हथियार हैं। हमारी सेना दुनिया की शक्तिशाली सेनाओं में से एक है। अब चीन को भारत की तरफ निगाह उठाने की भूल नहीं करनी चाहिए। भारतीय सेना उसे हर मोर्चे में जवाब देने में सक्षम है। उनका कहना है कि घरेलू मोर्चे पर भी हम उसके सामान का बहिष्कार करके आर्थिक सबक सिखा सकते हैं।

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