जागरण संवाददाता, हरिद्वार।  धर्म संसद में शामिल संतों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज करने और गिरफ्तारी के विरोध में होने वाली प्रतिकार सभा दो दिन पहले शुक्रवार को शुरू हो गई। उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र नारायण त्यागी (पूर्व नाम वसीम रिजवी) की गिरफ्तारी के बाद सर्वानंद घाट पर वीरवार शाम शुरू स्वामी यति नरसिंहानंद के सत्याग्रह को प्रतिकार सभा में परिवर्तित कर दिया गया। दोपहर बाद यहां प्रतिकार यज्ञ भी शुरू किया गया है, जिसकी पूर्णाहुति 16 जनवरी को होगी। स्वामी यति नरसिंहानंद के समर्थन में स्वामी अमृतानंद और स्वामी आनंद स्वरूप अन्न-जल त्याग सत्याग्रह में शामिल हुए। महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि, स्वामी प्रमोद आनंद, ललित आनंद और स‍िंधु सागर महाराज ने भी उपवास रखा। उन्होंने अन्य संतों से भी समर्थन देने को आह्वान किया।

पिछले साल 17 से 19 दिसंबर तक हरिद्वार में हुई धर्म संसद मामले में हालिया दिनों में हरिद्वार कोतवाली में दो मुकदमे दर्ज कराए गए। इनमें गाजियाबाद उप्र स्थित डासना मंदिर के परमाध्यक्ष और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिंहानंद, जितेन्द्र नारायण त्यागी और कुछ संतों समेत नौ नामजद हैं। इन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। जितेंद्र नारायण त्यागी पर आपित्तजनक टिप्पणी करने संबंधी एक मामला अलग से दर्ज है। तीनों की जांच एसआइटी कर रही है। स्वामी यति नरसिंहानंद पर भी समुदाय विशेष की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मुकदमा विगत दिवस दर्ज किया गया। वीरवार शाम एसआइटी ने स्वामी यति नरसिंहानंद के साथ हरिद्वार आते वक्त जितेन्द्र नारायण त्यागी को उप्र सीमा पर नारसन में गिरफ्तार कर लिया था। शनिवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है।

जितेन्द्र नारायण त्यागी की गिरफ्तारी के बाद स्वामी वीरवार रात से यति नरसिंहानंद ने सर्वानंद घाट पर सत्याग्रह शुरू कर दिया था। शुक्रवार को कुछ अन्य संतों ने वहां पहुंचकर समर्थन दिया। धर्म संसद में शामिल संतों ने मुकदमे दर्ज किए जाने के विरोध में 16 जनवरी को बैरागी कैंप में प्रतिकार सभा आहूत की थी, लेकिन अब सर्वानंद घाट पर चलाए जा रहे सत्याग्रह को ही प्रतिकार सभा का रूप दे दिया गया। स्वामी यति नरसिंहानंद के अनुसार सत्याग्रह स्थल पर यज्ञ भी किया जा रहा है, 16 जनवरी को पूर्णाहुति डाली जाएगी। दोहराया कि, जितेन्द्र नारायण त्यागी की रिहाई तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा।

संतों के दमन के विरोध में धर्मयुद्ध शुरू: स्वामी यति नरसिंहानंद

महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिंहानंद ने कहा कि उत्तराखंड और देश में हो रहे संत दमन को लेकर सरकार के विरोध में धर्मयुद्ध शुरू हो गया है। यह युद्ध सनातन हिंदू धर्म और संतों की रक्षा के लिए है।

सत्याग्रह स्थल पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि, धर्म की रक्षा और धर्म जग-जागरण करना संतों का दायित्व है। सनातन काल से संत समाज यह काम निष्ठापूर्वक करता चला रहा है। इस पर कभी रोक नहीं लगी। ब्रिटिशकाल में भी संतों को धर्म का प्रचार-प्रसार करने की छूट थी। इसे लेकर कभी उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। पर, अब उन पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, उन्हें जेल भेजा जा रहा है।

उन्होंने नाराजगी जताई कि यह सब केवल सनातन हिंदू संतों पर ही हो रहा है। सनातन हिंदू धर्म पर अनर्गल टिप्पणी, लालच देकर मतांतरण कराने और सनातन धर्म के विरुद्ध खुला प्रचार करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही, अब इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। स्वामी यति नरसिंहानंद ने कहा कि सत्याग्रह उनका निर्णय था, उन्होंने किसी भी संत को इसमें साथ देने को नहीं बुलाया, सभी अपनी सोच के साथ इसमें सम्मिलित हो रहे हैं।

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Edited By: Raksha Panthri

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