देहरादून, राज्य ब्यूरो। कश्मीरी छात्र-छात्राओं को देहरादून से पीडीपी नेताओं द्वारा वापस कश्मीर ले जाने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई संबंधी उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बयान पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे शर्मनाक बताया है।

दरअसल, बुधवार को वरिष्ठ भाजपा नेता और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मीडिया से बातचीत में देहरादून से कश्मीरी छात्र-छात्राओं को पीडीपी नेताओं द्वारा कश्मीर ले जाने पर आपत्ति की थी। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को ले जाने का जिम्मा अभिभावकों पर है। यह कार्य किसी अन्य को नहीं दिया जा सकता है। छात्र-छात्राओं को ले जाने के मामले में कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा का भार राज्य सरकार पर है। महाराज के इस बयान पर गुरुवार को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर तीखी प्रतिक्रिया दी। हालांकि ट्वीट में उन्होंने महाराज के नाम का जिक्र नहीं किया है।

महबूबा मुफ्ती ने अपने ट्वीट में कहा है कि उत्तराखंड के भाजपा मंत्री उन पीडीपी नेताओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराना चाहते हैं, जो देहरादून जाकर परेशान कश्मीरी छात्रों को ढांढस बंधाने और उन्हें वापस ले जाने आए थे। इस मामले में अराजक तत्वों पर कार्रवाई करने की बजाए वह बेकसूर कश्मीरियों को ही सजा देना चाहते हैं। ट्वीट में अंत में उन्होंने इसे शर्मनाक (शेम) लिखा है।

गौरतलब है कि मंगलवार को जम्मू-कश्मीर से उत्तराखंड दौरे पर आए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने यहां पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों से मुलाकात की थी और उनकी सुरक्षा पर संतोष जताया था। साथ ही कहा था कि सोशल मीडिया पर कश्मीरी छात्रों को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है कि उनके साथ मारपीट हो रही है, जबकि कश्मीरी छात्र-छात्राओं से मुलाकात में यह बात निराधार साबित हुई। प्रतिनिधिमंडल ने उन कश्मीरी छात्रों की निंदा भी की थी जिन्होंने सोशल मीडिया पर देशविरोधी कृत्य किया है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल राज्यसभा सदस्य फैयाज अहमद मीर, पूर्व विधायक एजाज अहमद मीर, यूथ कोऑर्डिनेटर परवेज वफा व नेता वाहिद उर्रहमान परा शामिल थे। दल ने कश्मीरी छात्रों की बेहतर सुरक्षा को लेकर पुलिस व प्रशासन की सतर्कता पर संतोष जताया था। हालांकि, कुछ छात्रों ने संस्थानों में छुट्टी के चलते प्रतिनिधिमंडल के साथ जाने की इच्छा जताई थी, जिसके कारण करीब डेढ़ सौ छात्र-छात्राओं को बसों से उनके साथ भेज दिया गया।

यह भी पढ़ें: हरीश रावत और इंदिरा हृदयेश पहुंचे शहीद के घर, फोटो खींचने पर भड़के परिजन

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा को लेकर पीडीपी संतुष्ट

यह भी पढ़ें: निर्दोष कश्मीरी छात्रों के पक्ष में उतरी एनएसयूआइ, सुरक्षा की पैरवी

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस