Rishikesh में शुरू हुआ International Yoga Festival, जुटे 50 देशों के एक हजार से ज्यादा साधक
International Yoga Festival 2025 ऋषिकेश में आज से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव। 50 देशों के एक हजार से अधिक योग जिज्ञासु महोत्सव में शामिल हो रहे हैं। आध्यात्मिक ज्ञान सत्र पैनल में प्रसिद्ध योगाचार्य और स्वास्थ्य विशेषज्ञ जैक बुश राम कुमार कुट्टी गणेश राव आमिश शाह मीराबाई शामिल हुए। ड्रमवादक शिवमणि प्रसिद्ध आध्यात्मिक गायक कैलाश खेर गिल रान शामा रुना रिजवी शिवमानी एमसी योगी गुरनमित सिंह ने प्रस्तुतियां दी।
जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। International Yoga Festival 2025: परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में 50 देशों के 1000 से ज्यादा योग जिज्ञासुओं ने हिस्सा लिया है। पहले दिन हुए विभिन्न सत्रों में योग जिज्ञासुओं ने योग एवं अध्यात्म को करीब से जाना।
संस्था अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने योग जिज्ञासुओं को योग एवं ध्यान साधना से जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों से अवगत कराते हुए प्रेरित किया। रविवार को परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती की उपस्थिति में सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ। 48 देशों से 65 प्रतिष्ठित योगाचार्य योग जिज्ञासुओं को योगाभ्यास कराएंगे।
कुंडलिनी साधना का अभ्यास
सर्वप्रथम सुबह ब्रह्ममुहूर्त पर अमेरिका से आए योगाचार्य गुरुमुख कौर खालसा ने कुंडलिनी साधना का अभ्यास कराया। योग शिविर में योग, ध्यान, प्राणायाम, आयुर्वेद की विभिन्न विधाओं का अभ्यास कराया जाएगा। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि योग, शिव और शक्ति का मिलन है, जिससे शांति व प्रेम का मार्ग प्रशस्त होता है। योग की जन्मभूमि में आकर योग केवल शरीर का नहीं बल्कि आत्मा का भी होता है।
जब उत्तराखंड की धरती पर योग करते हैं, तो यह शरीर से अधिक, आत्मा को जोड़ने का एक प्रयास होता है। स्वामी चिदानंद ने कहा कि योग का उद्देश्य केवल शरीर के आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि एकता, शांति और प्रेम की भावना को भी बढ़ावा देता है। उत्तराखंड, जो योग का जन्म स्थल है और संपूर्ण विश्व को जोड़ने का एक अद्वितीय साधन बन चुका है।
साध्वी भगवती सरस्वती ने वैदिक संस्कृति और आत्मिक दिव्यता पर विचार रखते हुए कहा कि वैदिक परंपरा में हम मूल पाप में नहीं, बल्कि मूल दिव्यता में विश्वास करते हैं। योग हमें हमारे सत्य से जोड़ता है, क्योंकि यह शरीर, मन और आत्मा के बीच गहरा संतुलन स्थापित करता है। जब हम योग का अभ्यास करते हैं, तो हम अपनी आंतरिक वास्तविकता को समझने लगते हैं। यह केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का मार्ग है।
विभिन्न सत्रों में जिज्ञासुओं ने लिया हिस्सा
पहले दिन कैलिफोर्निया से आए योगाचार्य गुरुशबद सिंह खालसा ने कुंडलिनी साधना सत्र से शुरूआत कराई। योगाचार्य आकाश जैन और योगाचार्य राधिका गुप्ता ने सूर्य नमस्कार के 5 तत्व, डी. योगऋषि विश्वकेतु ने हिमालयन श्वास प्राणायाम और सियाना शरमेन ने करुणा चक्र पर आधारित रसा योग का अभ्यास कराया। अगले सत्रों में योगासन विन्यास क्रम के बारे में बताया। आनंद महरोत्रा ने शक्ति का जागरण से जिज्ञासुओं को योग और प्राणायाम के शारीरिक और आध्यात्मिक लाभों की ओर प्रेरित किया।
नशामुक्ति विशेषज्ञ टामी रोजेन ने जिज्ञासुओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए नशा सेवन त्यागने को प्रेरित किया। ‘योग क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?’ विषय पर आधारित सत्र में डा. गणेश राव, साध्वी भगवती सरस्वती, आनंद मेहरोत्रा व गंगा नंदिनी ने योग व अध्यात्म की दिव्यता से अवगत कराया। इससे व्यक्तित्व एवं बौद्धिक स्तर पर आने वाले बदलावों को अपने अनुभवों के आधार पर साझा किया। इसके अलावा आयुर्वेद, संगीत एवं ध्वनि पर आधारित सत्रों में जिज्ञासुओं को महत्वपूर्ण जानकारियां मिली।
सांस्कृतिक संकीर्तन में शामिल हुए योग जिज्ञासु
शाम को गंगा घाट पर पवित्र गंगा आरती और संकीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें कनाडा के तीसरी पीढ़ी के कीर्तन गायक गुरु निमत सिंह व संगीतज्ञ सत्यानंद ने संकीर्तन किया। इस संकीर्तन में योग जिज्ञासुओं ने आनंद की अनुभूति की।
तीर्थनगरी में बढ़ा वाहनों का दबाव, दिन भर बदलता रहा ट्रैफिक प्लान
ऋषिकेश: तीर्थनगरी में सप्ताहंत पर वाहनों का दबाव सड़कों पर बढ़ गया। पूरा दिन शहर में ट्रैफिक प्लान बदलता रहा। डायर्वट रूटों से वाहन भेजे गए। रविवार को भी वाहनों की संख्या बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में पुलिस जरूरत के आधार पर आज भी प्लान लागू करेगी।
शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम रही है। सप्ताहंत में हर बार जाम के हालात बन जाते हैं। इस बार द्वितीय शनिवार के अवकाश के चलते वाहनों का अतिरिक्त दबाव पड़ा। सुबह से ही राफ्टिंग के लिए आने वाले पर्यटक पहुंचने लगे थे। इसके साथ ही होली मनाने के लिए भी कई लोग यहां पहुंचने शुरू हो गए है।
सुबह साढ़े दस बजे के आसपास वाहनों का दबाव बहुत तेजी से बढ़ने लगा। नगर निगम कार्यालय के बाहर से लेकर चंद्रभागा पुल तक वाहन रेंग-रेंग कर चलते रहे। इसके बाद वाहनों को कुछ देर के लिए तिलक रोड की ओर से भेजा गया। दोपहर करीब एक बजे घाट चौक से लेकर दून तिराहे तक वाहन पूरी तरह जाम में फंस गए। वाहन आगे नहीं खिसक पा रहे थे।
पुलिस ने इसके बाद घाट चौक पर बैरियर लगाकर आगे वाहनों की एंट्री बंद कर दी। उन्हें पुराना रेलवे रोड की ओर से भेजा गया। करीब आधे घंटे बाद स्थिति कुछ सामान्य होने पर वाहनों को सीधे चंद्रभागा की ओर भेजा गया। चंद्रभागा पुल के पास भी दिन भर जाम के हालात रहे। यहां से वाहनों को बस अड्डे की ओर भेजा गया।
रविवार को शनिवार से अधिक भीड़ पहले ही रहती है। इसे देखते हुए आज के लिए भी पुलिस जरूरत के आधार पर वाहनों को डायर्वट रूट से भेजेगी। यातायात प्रभारी अनवर खान ने बताया कि वाहनों के दबाव के अनुसार रूट को डायर्वट किया गया। रविवार को भी जरूरत के आधार पर बैरिकेडिंग लगा वाहनों को डायवर्ट रूट से भेजा जाएगा।
बीच सड़क पर वाहन रोकने से भी दिक्कत
तिपहिया वाहन चालकों के बीच में सवार बैठाने के लिए वाहन रोकने के कारण भी स्थिति बिगड़ी। वाहनों के आने का सिलसिला लगातार जारी था। ऐसे कें कुछ देर के लिए भी कोई चालक सड़क पर सवारी बैठाने के लिए वाहन रोकता तो पीछे जाम बढ़ जाता।
ट्रैफिक पुलिस के जवान लगातार सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों को हटवाते रहे। शाम तक भी वाहनों का दबाव बना हुआ था। दबाव बढ़ने पर चीला रूट से भेजेंगे वाहन लक्ष्मणझूला क्षेत्र में वाहनों का दबाव बढ़ने पर वापसी का रूट चीला रहेगा।
लक्ष्मणझूला थाने के ट्रैफिक प्रभारी अमित भट्ट ने बताया कि शनिवार, रविवार को अन्य दिनों की अपेक्षा वाहनों का दबाव अधिक रहता है। शनिवार को रूट डायवर्ट करने की जरूरत नहीं पड़ी। अगर ऋषिकेश क्षेत्र में वाहनों का दबाव बढ़ता है तो रविवार को वाहनों की वापसी मुनिकीरेती से न होकर वाया चीला की जाएगी।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।