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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 08, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यहां महिलाओं ने खड़ा किया बांज का दो हेक्टेयर जंगल, 22 साल पहले पहाड़ी पर रोपे थे पौधे

By Raksha PanthriEdited By:
Published: Mon, 08 Mar 2021 09:08 AM (IST)

पहाड़ की महिलाओं ने जब और जहां मौका मिला अपनी हिम्मत की मिसाल कायम की है। इसकी बानगी हैं पहाड़ों ...और पढ़ें

यहां महिलाओं ने खड़ा किया बांज का दो हेक्टेयर जंगल। जागरण
यहां महिलाओं ने खड़ा किया बांज का दो हेक्टेयर जंगल। जागरण

सूरत सिंह रावत, मसूरी। पहाड़ की महिलाओं ने जब और जहां मौका मिला, अपनी हिम्मत की मिसाल कायम की है। इसकी बानगी हैं पहाड़ों की रानी मसूरी के निकट स्थित ग्राम भटोली की महिलाएं। इन महिलाओं ने गांव के पास की वीरान पहाड़ी पर दो हेक्टेयर में बांज का जंगल उगाया है। इसकी देखभाल ये सभी महिलाएं मिल-जुलकर करती हैं। वो जंगल में न तो अपने गांव के मवेशियों को घुसने देती हैं, न समीप के गांवों के मवेशियों को ही। उनकी अनुमति के बिना कोई जंगल से एक पत्ता भी नहीं तोड़ सकता। जंगल में आग लगने की घटना होने पर सभी महिलाएं मिलकर उसे बुझाने में जुट जाती हैं। इसमें गांव के पुरुष भी उनका भरपूर सहयोग करते हैं।

387 की आबादी वाले भटोली गांव में 25 परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों की महिलाओं ने 22 साल पहले गांव के पास वीरान पहाड़ी के दो हेक्टेयर हिस्से में बांज के पौधे रोपकर उनकी बच्चों की तरह परवरिश की। साथ ही जंगल की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया। आज नतीजा सबके सामने है। भटोली गांव की महादेई, शांति देवी, सरो देवी, सुंदरा देवी, पूनम बर्त्वाल, कम्मो देवी, किरन बर्त्वाल, बबिता रावत आदि ने बताया कि इस कार्य के लिए न तो कभी उन्हें पंचायत की कोई मदद मिली, न वन विभाग की ओर से ही। 

उल्टा कैम्पटी वन रेंज की ओर से कई बार हमारे उनके जंगल को वन  विभाग में शामिल करने को कहा गया। हालांकि, गांव की महिलाओं ने साफ मना कर दिया। अब जंगल घना हो चुका है और गांव वाले इसके चारों ओर तारबाड़ करना चाहते हैं, लेकिन इस कार्य के लिए उनके पास बजट नहीं है। बावजूद इसके उन्हें उम्मीद है कि वनमंत्री व मुख्यमंत्री इस कार्य में उनकी मदद करेंगे।

कैम्पटी रेंज की वन क्षेत्राधिकारी नीलम बर्त्वाल ने बताया कि भटोली गांव की महिलाओं ने वाकई एक मिसाल कायम की है। महिलाओं द्वारा तैयार किया गया बांज का जंगल वन पंचायत के अंतर्गत आता है। अग्नि काल में वन विभाग महिलाओं की मदद को हमेशा तैयार रहता है। जंगल में नमी बनाए रखने को वन विभाग की ओर से ऊपरी भाग में कार्य करवाया गया है।

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