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    क्यारकुली गांव के ऊपर से टनल शुरू होगी तो दिक्कत नहीं, मसूरी को जाम से निजात दिलाने को प्रस्तावित है योजना

    मसूरी शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित 2.74 किमी लंबी टनल को लेकर अभी से तरह-तरह की आशंका जताई जाने लगी हैं। सबसे ज्यादा आशंका इस बात की जताई जा रही है कि टनल के निर्माण से पेयजल योजनाओं के स्रोत प्रभावित हो सकते हैं।

    By Raksha PanthriEdited By: Updated: Tue, 29 Jun 2021 10:35 AM (IST)
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    क्यारकुली गांव के ऊपर से टनल शुरू होगी तो दिक्कत नहीं।

    जागरण संवाददाता, देहरादून। मसूरी शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित 2.74 किमी लंबी टनल को लेकर अभी से तरह-तरह की आशंका जताई जाने लगी हैं। सबसे ज्यादा आशंका इस बात की जताई जा रही है कि टनल के निर्माण से पेयजल योजनाओं के स्रोत प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, खुद पेयजल निगम के अधिकारियों ने इस आशंका को खारिज किया है। साथ ही सुझाव दिया है कि टनल की शुरुआत क्यारकुली गांव के नागदेवता क्षेत्र से की जानी चाहिए।

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    पेयजल निगम के मुख्य अभियंता (गढ़वाल) एससी पंत के मुताबिक, देहरादून में अधीक्षण अभियंता रहते हुए उन्होंने टनल शुरू करने के लिए क्यारकुली गांव के ऊपर के प्वाइंट का सुझाव दिया था। इस क्षेत्र में कोई भी पेयजल योजना नहीं है और न ही कोई जल स्रोत है। उन्होंने बताया कि सभी पेयजल योजनाएं मरकांडी और कैम्पटी रोड की तरफ हैं। अगर इस तरफ से टनल का निर्माण शुरू किया जाता है तो मसूरी की पेयजल आपूर्ति गड़बड़ा सकती है। मुख्य अभियंता के मुताबिक टनल का निर्माण क्यारकुली गांव के ऊपरी क्षेत्र से शुरू कर मसूरी इंटरनेशनल स्कूल के दायीं तरफ तक किया जा सकता है।

    नौ जल स्रोत प्रभावित होने की आशंका

    विशेषज्ञ और पेयजल योजनाओं के जानकार बता रहे हैं कि टनल निर्माण से नौ पेयजल योजनाएं/जलस्रोत प्रभावित हो सकते हैं। ये जलस्रोत टनल के रूट के करीब तीन किमी के दायरे में हैं। इनसे मसूरी को रोजाना 50 लाख लीटर पानी पहुंचाया जाता है। इन स्रोत में भिलाड़ू, जिंसी, खनाल्टी, कंडीघाट, बांसी, जॉन मैकनॉन, अंडर क्लिफ, न्यूबाई, छमरकुंड शामिल हैं।

    उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के भूविज्ञानी और निदेशक डा. एमपीएस बिष्ट ने बताया कि टनल बनने से पेयजल स्रोत प्रभावित हो सकते हैं। अगर संबंधित रूट पर पेयजल स्रोत नहीं हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। टनल के निर्माण से पहले स्रोतों की मैपिंग, उनके डिस्चार्ज रूट आदि की जानकारी जुटाई जानी चाहिए।

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