देहरादून, अंकुर शर्मा। जैसे भी संभव हो जल, जंगल, जमीन को बचाना जरूरी है। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान ने ऐसी ही अनूठी पहल की है। संस्थान ने गोपेश्वर में एक गड्ढे में पानी भरकर एक्विटिक हर्बल गार्डन (जलीय औषधीय उद्यान) बनाया है। इस गार्डन में विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी जलीय जड़ी बूटी, औषधीय वनस्पतियों को रोपा गया है। ये वनस्पतियां कई गंभीर बीमारियों में रामबाण औषधि भी हैं। इससे जड़ी-बूटी की खेती को और जलीय स्रोत, जल संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इस मॉडल के जरिये संस्थान किसानों को जड़ी बूटी के खेती को प्रेरित करना चाहता है।

दलदल वाली जमीन में भी बन सकता है ये गार्डन: एक्विटिक हर्बल गार्डन एक आद्र भूमि पारिस्थितिक तंत्र की तरह है। इसको दलदल वाली जमीन, तालाब, जल स्रोतों के किनारे भी बनाया जा सकता है। इसके अलावा नम मिट्टी वाले इलाके में भी यह गार्डन आसानी से बन जाएगा।

20 हजार में बन जाएगा गार्डन

शोध संस्थान के मुताबिक इस गार्डन की लागत महज 10-20 हजार रुपये है। संस्थान पांच नाली भूमि तक यह गार्डन बनाने पर मुफ्त में औषधीय वनस्पतियों के बीज मुहैया कराता है।

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