देहरादून, विकास गुसाईं। उत्तराखंड में देश के पहले हेलीकॉप्टर समिट के सफल आयोजन से बेहतर हवाई सेवाओं की उम्मीद को पंख लगते नजर आ रहे हैं। जिस तरह से केंद्रीय अधिकारियों ने उत्तराखंड की समस्याओं को समझ कर उसे तरजीह दी है, उससे सकारात्मक परिणाम आने की संभावनाएं जग रही हैं। हेली कंपनियों द्वारा उठाए गए मुद्दे भी उनके उत्तराखंड के प्रति रूझान को स्पष्ट कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने भी सब्सिडी देने और सुरक्षा समेत अन्य सुविधाओं को बढ़ाने की बात कर इस पहल को संबल दिया है। यही कारण है कि अब सहस्रधारा स्थित हेलीड्रोम के दूसरे हैंगर को पीपीपी मोड में संचालित किए जाने पर सही दिशा में कदम आगे बढ़े हैं।

केंद्र ने उत्तराखंड में फिक्की के सहयोग से देश का पहला हेलीकॉप्टर समिट कराया है। पर्यटन व आपदा की दृष्टि से यह समिट उत्तराखंड के लिए बेहद खास रहा। देखा जाए तो प्रदेश में हेली सेवाएं तेजी से बढ़ रही हैं। वर्ष 2003 में केदारनाथ के लिए पहली हवाई सेवा शुरू की गई थी। आज प्रदेश में केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और चारधाम के लिए 18 हेली सेवाएं संचालित हो रही हैं।

वर्तमान में प्रदेश में प्रतिवर्ष दो लाख यात्री हेली सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। आज प्रदेश में 51 हेलीपैड, दो एयरपोर्ट, तीन एयर स्ट्रिप और अब एक वॉटर हेलीड्रोम बन गया है। हवाई सेवाओं के लिए इतनी अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने के बाद भी प्रदेश में हेली संचालकों का न मिलना निश्चित रूप से एक चिंताजनक विषय बना हुआ है। हालांकि, इसके पीछे एक बड़ा कारण प्रदेश में हेली सेवा संचालन के लिए स्पष्ट नीति न बनने के रूप में सामने आया है। जिस तरह से हेली कंपनी संचालकों ने प्रदेश सरकार के सामने नीतियों में स्पष्टता और टैक्स व सुविधाओं के संबंध में बात रखी है उससे प्रदेश को भी हेली कंपनियों के न आने के कारणों का पता चला है। जिस पर अब सरकार काम कर सकती है। 

यह समिट का ही फायदा रहा कि इसमें शिरकत करने पहुंची कंपनियों ने हैंगर को पीपीपी मोड पर चलाने में रूचि दिखाई है। उन्होंने हैंगर का निरीक्षण करने के साथ ही कुछ बिंदुओं की ओर सरकार का ध्यान भी आकर्षित किया है। अब जब सरकार के सामने सारी स्थितियां तकरीबन साफ हो चुकी है तो इससे बेहतर हेली सेवाओं के संचालन की राह साफ हो गई है।

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कम दरों के कारण नहीं आई हेली कंपनियां

प्रदेश में एयर एंबुलेंस चलाने के लिए हेली कंपनियां कम किराये के कारण सामने नहीं आई थीं। दरअसल, स्वास्थ्य महकमे ने इसके लिए किराये की दर 75 हजार रुपये रखी थी, जो हेली कंपनियों के लिए काफी कम थी। इस कारण किसी कंपनी ने इसके लिए टेंडर नहीं डाला। अब विभाग इन दरों में बदलाव की तैयारी कर रहा है।  

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