देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: उत्तराखंड को जैविक प्रदेश बनाने की कोशिशों में जुटी राज्य सरकार अब जल्द ही जैविक कृषि उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने जा रही है। इसके लिए प्रारंभिक कसरत कर ली गई है। जैविक कृषि के क्लस्टर तैयार करने की मुहिम पूरी होते ही एमएसपी का ऐलान कर दिया जाएगा। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार किसानों से कृषि विपणन बोर्ड और कृषि मंडियां उत्पाद खरीदेंगी। इसके अलावा सरकार जैविक कृषि उत्पाद मेलों का आयोजन भी करेगी। 

वर्तमान में केंद्र सरकार का फोकस भी देश में जैविक जैविक कृषि को बढ़ावा देने पर है। इसके लिए राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के तहत परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) में तमाम प्रावधान किए गए हैं। मंशा ये है कि जैविक खेती को वर्षा आधारित खेती वाले इलाकों, पर्वतीय व आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जाए, क्योंकि इन क्षेत्रों में खेती में रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का प्रयोग न के बराबर है। 

इस कसौटी पर विषम भूगोल वाला उत्तराखंड खरा उतरता है। राज्य के 95 में से 71 विकासखंडों में कृषि बारानी यानी वर्षा पर निर्भर है। साथ ही कृषि व्यवस्था पहाड़ी, घाटी व मैदानी इलाकों में विभक्त है। फिर यहां के पर्वतीय व घाटी वाले इलाकों के जैविक कृषि उत्पादों की देशभर में खासी मांग भी है। 

यही वजह भी है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को जैविक प्रदेश बनाने पर जोर दिया था। इसके लिए राज्य सरकार ने कदम बढ़ाने प्रारंभ कर दिए हैं। अभी तक प्रदेश में 10 विकासखंडों को जैविक घोषित किया गया था, लेकिन अब सभी जिलों में जैविक खेती की मुहिम ले जाने की तैयारी है। इसके अन्य कदम उठाने के साथ ही जैविक उत्पादों का समर्थन मूल्य घोषित करने पर मंथन चल रहा है। 

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के मुताबिक जैविक कृषि उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने के पीछे मंशा किसानों को राहत देने की है। किसान के पास उत्पादों की कीमत निर्धारण का एक पैमाना भी होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को बाजार मुहैया कराने के मद्देनजर जैविक कृषि उत्पाद मेलों के आयोजन पर भी गंभीरता से मंथन चल रहा है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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