देहरादून, जेएनएन। प्रदेश सरकार राजकीय विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों से सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने की तैयारी कर रही है। हालांकि यह व्यवस्था कब से लागू होगी, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं की गई है। सरकार का निर्णय सुनने के बाद से विरोध में आवाज उठनी शुरू हो चुकी है। आधुनिक पढ़ाई की महत्ता समझने वाले शिक्षक और छात्र दोनों इसके खिलाफ हैं। इन लोगों का मत है कि सरकार को सेमेस्टर सिस्टम से भागना नहीं चाहिए, बल्कि राज्य के विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। जिससे पढ़ाई की यह आधुनिक प्रणाली हर कॉलेज में लागू हो और अंतिम छात्र तक इसका फायदा पहुंचे। 

शिक्षाविदों का कहना है कि सेमेस्टर सिस्टम के खत्म होने का मतलब है कि आधुनिक तकनीक होने के बाद भी हम पाषाण युग में जी रहे हैं। प्रदेश में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और स्नातकोत्तर यानि पीजी पाठ्यक्रमों में पहले से ही सेमेस्टर सिस्टम है। सभी जगह सुचारू रूप से सिस्टम संचालित भी हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि छात्र संख्या के एवज में पर्याप्त शिक्षक और संसाधन होना।

स्नातक यानि यूजी में छात्र संख्या अधिक होती है। जबकि महाविद्यालयों में न तो शिक्षक पूरे हैं और न ही संसाधन। हाल यह हैं कि जिन सॉफ्टवेयर से छात्रों के परीक्षाफल तैयार होते हैं, उनकी गुणवत्ता निम्न स्तर की है। जिससे हर साल छात्रों के परिणाम में कई गलतियां होती हैं। दून के कॉलेजों में पढ़ रहे कई छात्र और शिक्षक सेमेस्टर सिस्टम के समर्थन में हैं। उनकी सरकार से यही अपील है कि सरकार बड़ी समस्या का छोटा समाधान न निकाले। बल्कि समस्या को समझकर उपाय करे। 

पलायन को मिलेगा बढ़ावा 

प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा में आधुनिक शिक्षा प्रणाली से मुंह मोड़ कर भविष्य के लिए कई समस्याएं खड़ी कर रही है। इसमें से एक है पलायन। सरकार जिस पलायन को कम करने के लिए ऐढ़ी-चोटी का बल लगाने को तैयार है, सेमेस्टर सिस्टम खत्म होना इसे बढ़ावा दे सकता है। एसजीआरआर पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीए बौड़ाई का कहना है कि हर अभिभावक अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा चाहता है। लेकिन प्रदेश में जब आधुनिक शिक्षा उपलब्ध नहीं होगी तो छात्र अन्य राज्यों में जाएंगे। 

नैक ग्रेडिंग और यूजीसी की ग्रांट में पड़ेगा फर्क 

वर्तमान में यूजीसी के तहत रूसा की ग्रांट पाने के लिए नैक ग्रेडिंग अनिवार्य हो गई है। वहीं यूजीसी की कई अन्य ग्रांट भी नैक ग्रेडिंग पर निर्भर होती है। खुद उच्च शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. धन सिंह रावत लंबे समय से कॉलेजों को नैक टीम के दौरे और इससे ग्रेडिंग दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेकिन प्रदेश के कॉलेजों में सेमस्टर सिस्टम ही नहीं होगा तो नैक की ग्रेडिंग में पिछड़ना तय है। 

एनसीसी, एनएसएस और खेल के छात्र भी पक्ष में 

राज्य सरकार ने सेमेस्टर सिस्टम हटाने के पीछे एनसीसी, एनएसएस और खेल में प्रतिभाग करने वाले छात्रों की आड़ ली है। सरकार का कहना है कि सेमेस्टर सिस्टम के चलते छात्र एनसीसी, एनएसएस और खेल में प्रतिभाग नहीं कर पाते। लेकिन वर्तमान में इन कार्यक्रमों में शामिल छात्रों का कहना इसके विपरीत है। छात्रों ने बताया कि सेमेस्टर सिस्टम होना उनके लिए सहूलियत है। इसके होने से एनसीसी, एनएसएस और खेल कैंप करने के बावजूद कम समय में छूटा पाठ्यक्रम पूरा पढ़ा जा सकता है। लेकिन सालाना सिस्टम में पाठ्यक्रम बहुत अधिक होता है। कैंप करने के बाद जिसे पूरा करना कठिन होता है। 

डीएवी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जीपी डंग का कहना है कि मध्य प्रदेश में हाल ही में सेमेस्टर सिस्टम हटाया गया। इसके ठीक बाद यूजीसी के चेयरमैन ने राज्यों को ऐसा न करने की सलाह दी। राज्य सरकार केंद्र के विरुद्ध जाकर गलत कर रही है। आने वाले समय में प्रदेश के छात्रों को इससे बड़े नुकसान होंगे। 

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डीबीएस पीजी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं कि सरकार को सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने के बजाय प्रदेश के महाविद्यालयों को संसाधनों से संपन्न करना होगा। सीबीसीएस सिस्टम से छात्रों पर लगातार नजर रखी जाती है। इससे छात्रों में सुधार की गुंजाइश भी बढ़ जाती है। सालाना सिस्टम में कई छात्र तो एक दफा दाखिला लेने के बाद अंत में परीक्षा देने की पहुंचते हैं।  

वहीं, एसजीआरआर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार को समस्याओं से भागना नहीं चाहिए। वर्तमान सरकार चाहे तो हर स्तर पर महाविद्यालयों को संसाधन उपलब्ध करवा सकती है। सेमेस्टर सिस्टम खत्म करना यानि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना होगा। 

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बोले छात्र 

छात्रा साक्षी बड़ोनी कहती हैं कि सीबीसीएस सिस्टम आधुनिक पढ़ाई का एक बेहतर सिस्टम है। यह पढ़ाई के बोझ को कम करता है। पढ़ाई बंट जाती है और एक बार में सारे कठिन विषय नहीं पढ़ने होते। इससे छात्रों के सिर पर पढ़ाई का बोझ नहीं होता। प्रदेश में यह लागू रहना चाहिए। 

छात्र नरेंद्र राणा का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सीबीसीएस बेहतर सिस्टम है। दसवीं के बाद अंग्रेजी और हिंदी विषय में स्किल और कम्यूनिकेशन की पढ़ाई छूट जाती है। लेकिन सेमेस्टर में इन विषयों की तैयारी हो जाती है। 

मनोज राम कोठियाल का कहना है कि सेमेस्टर सिस्टम में लगातार परीक्षाएं और एसाइनमेंट होते हैं। इससे छात्र और शिक्षक दोनों लगातार पढ़ाई के संपर्क में होते हैं। शिक्षक छात्रों की कमियों पर काम कर पाते हैं। 

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Posted By: Raksha Panthari

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