राज्य ब्यूरो, देहरादून। कांग्रेस ने भू कानून को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार भू माफिया के दबाव में काम कर रही है। भूमि संशोधन कर पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि खरीदने का खुला अधिकार दिया गया है। पार्टी प्रदेश की जमीनों को बचाने के लिए संकल्पित है।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल और केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा कि भू-कानून में किए गए संशोधन के बाद हर व्यक्ति इसकी चर्चा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने नई पीढ़ी को उनकी ही जमीन पर नौकर बनाने की साजिश की है। पूर्वजों के खून-पसीने से अर्जित भूमि को औने-पौने दामों में खरीदने का रास्ता साफ किया गया है। उत्तराखंड में लागू उत्तरप्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम की धारा-143 व धारा-154 में परिवर्तन कर पर्वतीय जिलों में जमीन की लूट का रास्ता साफ किया गया है।

उन्होंने कहा कि धारा-154 में परिवर्तन के बाद सरकार औद्योगिक प्रयोजन के साथ ही सहकारी समिति, धार्मिक या अन्य संस्था को भी राज्य के पर्वतीय जिलों में जमीन खरीदने की अनुमति दे सकती है। जन साधारण के हित का कार्य बताकर पर्वतीय क्षेत्रों की भूमि को खरीदा जा सकता है। राज्य के मैदानी जिलों ऊधमसिंहनगर, हरिद्वार और देहरादून में भी हदबंदी (सीलिंग) की 12.5 एकड़ की सीमा समाप्त कर दी गई है। अब पर्वतीय और मैदानी दोनों ही भागों में जमीन की नीलामी के हालात बना दिए गए हैं।

गणेश गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कड़े भू कानून के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाने की बात कही है। मुख्यमंत्री को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि औद्योगिक प्रयोजन कितनी भूमि खरीदी गई और कितना निवेश आया है। उन्होंने सरकार से भू कानून में संशोधन होने के बाद यह आने वाले उद्योगों और पूंजी निवेश पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अब तक एनडी तिवारी और हरीश रावत सरकारों ने राज्य की जमीनों को बचाने के कानूनी उपाय किए थे। कांग्रेस राज्यभर की भू व्यवस्था में एकरूपता लाने की पक्षधर रही है। राज्य में जमीन से संबंधित दर्जनभर कानून हैं। उत्तरप्रदेश ने सभी कानूनों का एकीकरण या विलोपन कर उत्तरप्रदेश भू-राजस्व संहिता का रूप दे दिया। कांग्रेस राज्य में एकीकृत भू-कानून लागू करना चाहती है, ताकि बाहरी खरीदारों या मुफ्तखोर कंपनियों से राज्य की जमीनों की रक्षा की जा सके।

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Edited By: Sunil Negi