देहरादून, जेएनएन। चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) ने बैंक कर्मचारी के साथ मिलकर पशु प्रेमी गौरी मौलिखी के आयकर रिफंड के करीब 3.94 लाख रुपये डकार लिए। पुलिस ने आरोपित सीए को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बैंक कर्मचारी की तलाश की जा रही है। दोनों आरोपितों के खिलाफ शहर कोतवाली में धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

धारा चौकी इंचार्ज शिशुपाल राणा ने बताया कि रायपुर में रहने वाली गौरी मौलिखी के आयकर रिटर्न तिलक रोड निवासी सीए दिव्यांशु अग्रवाल भरता था। वर्ष 2015-16 से मौलिखी का आयकर रिफंड नहीं आ रहा था। इस संबंध में वह जब भी दिव्यांशु से पूछतीं तो वह टाल देता। संदेह होने पर मौलिखी ने दिल्ली के एक सीए से अपने आयकर खाते की जांच कराई, जिसमें पता चला कि उनका आयकर रिफंड प्रतिवर्ष आइसीआइसीआइ बैंक की हाथीबड़कला शाखा के एक खाते में आ रहा है। 

यह खाता गौरी मौलिखी के नाम पर ही था, लेकिन उन्हें जानकारी नहीं थी। मौलिखी ने बीते दिनों इसकी शिकायत शहर कोतवाली में की। पुलिस ने जांच में पाया कि दिव्यांशु ने आइसीआइसीआइ बैंक के कर्मचारी पवन मौर्य के साथ मिलकर मौलिखी के प्रमाण पत्रों का दुरुपयोग कर खाता खुलवाया था। इसी खाते में आयकर रिफंड आ रहा था।

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हाई कोर्ट ने उमेश की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

हाई कोर्ट ने पत्रकार उमेश शर्मा की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें पुलिस जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत ने 31 जुलाई को देहरादून के नेहरू कालोनी थाने में उमेश शर्मा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि पत्रकार उमेश शर्मा ने सोशल मीडिया में खबर चलाई कि प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत और उनकी पत्नी डॉ. सविता रावत के खाते में नोटबंदी के दौरान झारखंड से अमृतेश चौहान ने बड़ी धनराशि जमा कराई और इस धनराशि को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को देने को कहा। इस वीडियो में डॉ. सविता रावत को मुख्यमंत्री की पत्नी की सगी बहन बताया गया है। प्रो. हरेंद्र के अनुसार सभी तथ्य असत्य हैं और उमेश शर्मा ने बैंक के कागजात कूटरचित तरीके से बनाए हैं। उमेश शर्मा ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

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Edited By: Raksha Panthari