राज्य ब्यूरो, देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में जिस तक वैक्सीनेशन के लिए 1200 रुपये से लेकर 1500 रुपये लिए जा रहे हैं, वह आर्थिक रूप से कमजोर उत्तराखंड के व्यक्तियों पर बड़ा भार है। रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इंटरनेट मीडिया में एक पोस्ट कर कहा कि कोरोना के कारण प्रदेश के निवासियों की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है। कोरोना संक्रमण के साथ ही आर्थिक गतिविधियां व कामधंधा बंद होने के कारण लोग पहले से ही खस्ता हालत में हैं। अब जान बचाने के लिए जो सहारा नजर आ रहा है, वह वैक्सीन है। वैक्सीन भारत सरकार को 150 रुपये के हिसाब से मिल रही है।

राज्यों से कहा जा रहा है कि वे कंपनियों से 500 रुपये के हिसाब से वैक्सीन खरीदें। निजी अस्पताल इसके कहीं अधिक दाम वसूल रहे हैं। लोगों में कोरोना को लेकर जो भय है, उसका दोहन किया जा रहा है। जीवन बचाने के लिए जो सहारा है, उसकी आड़ में बड़ी लूट की जा रहा है। इसे देखने वाला भी कोई नहीं है। ऐसे में निजी अस्पतालों में वैक्सीन लगाना प्रदेश के निवासियों पर बड़ा भार बन रहा है।

त्रिवेंद्र के विचार से सहमत नहीं सरकार के प्रवक्ता उनियाल

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के उस वक्तव्य से प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सहमत नहीं हैं, जिसमें कहा गया है कि वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके व्यक्तियों को चारधाम यात्रा की अनुमति दी जानी चाहिए। सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत वरिष्ठ नेता हैं, उनके द्वारा जो कहा गया वह ठीक ही होगा। अलबत्ता, उनकी व्यक्तिगत राय है कि वैक्सीन की दोनों डोज लगाने वाला व्यक्ति खुद तो सुरक्षित है, लेकिन वह कोरोना संक्रमण के मद्देनजर कैरियर भी बन सकता है। ऐसे में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर परिस्थितियां सामान्य होने तक ऐसा करना फिलहाल ठीक नहीं है। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने रविवार को ऋषिकेश में एक कार्यक्रम के दौरान चारधाम यात्रा को खोलने की पैरवी की थी। इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होंने यह बात कही थी।

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