देहरादून, अंकुर अग्रवाल। प्रदेश के लोकगीत 'बेडु पाको बारामासा, नारैणा काफल पाको चैता' पर भले लोगों की थिरकन बढ़ जाती है और वे स्वयं को पहाड़ की वादियों में होने का अहसास भी करते हैं, लेकिन जिन फलों का इसमें जिक्र हुआ है, क्या वे उनके बारे में भी जानते हैं। अधिकांश का जवाब ना ही होगा। महत्व न मिलने से बेडू, तिमला, काफल और किनगोड़ समेत मेलू, घिंघोरा, अमेस और हिंसर जैसे जंगली फल हाशिये पर चले गए हैं। जबकि स्वादिष्ट एवं सेहत के लिहाज से महत्वपूर्ण इन फलों को बाजार से जोड़ने पर ये जंगली फल प्रदेश की आर्थिकी संवारने का जरिया बन सकते हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई पहल होती नहीं दिख रही। 

उत्तराखंड में पाए जाने वाले जंगली फल यहां की लोकसंस्कृति में गहरे तक रचे बसे हैं पर इन्हें वह महत्व आज तक नहीं मिल पाया है, जिसकी दरकार है। उत्तर प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बनने के बाद यहां जड़ीबूटी को लेकर तो खूब हो-हल्ला मचा, लेकिन इन पोषक फलों पर ध्यान किसी ने नहीं दिया और ये सिर्फ लोकगीतों तक ही सिमटकर रह गए। देखा जाए तो ये जंगली फल न सिर्फ स्वाद, बल्कि सेहत की दृष्टि से कम अहमियत नहीं रखते।

बेडू, तिमला, मेलू, काफल, अमेस, दाडि़म, करौंदा, तूंग, जंगली आंवला, खुबानी, हिसर, किनगोड़ समेत जंगली फलों की ऐसी 100 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें एंटी ऑक्सीडेंट और विटामिन की भरपूर मात्रा है। विशेषज्ञों के अनुसार इन फलों की इकोलॉजिकल व इकॉनामिकल वेल्यू है। इनके पेड़ स्थानीय पारिस्थितिकीय तंत्र को सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि फल सेहत और आर्थिक लिहाज से अहम हैं। 

बात केवल इन जंगली फलों को महत्व देने की है। अमेस (सीबक थार्म) को ही लें तो चीन में इसके दो-चार नहीं पूरे 133 प्रोडक्ट तैयार किए गए हैं और वहां फल उत्पादकों के लिए यह आय का बड़ा स्रोत है। उत्तराखंड में यह फल काफी मिलता है, पर इस दिशा में अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। काफल को छोड़ अन्य फलों का यही हाल है। काफल को भी जब लोग स्वयं तोड़कर बाहर लाए तो इसे थोड़ी बहुत पहचान मिली, लेकिन अन्य फल तो अभी भी हाशिये पर हैं। 

चलानी होगी मुहिम 

उपेक्षा का दंश झेल रहे जंगली फलों को महत्व देते हुए पूर्व में उद्यान विभाग ने मेलू (मेहल), तिमला, आंवला, जामुन, करौंदा, बेल समेत एक दर्जन जंगली फलों की पौध तैयार कराने का निर्णय लिया। इस कड़ी में कुछ फलों की पौध तैयार कर वितरित भी की जा रही है, लेकिन इसे विस्तार मिलना अभी बाकी है। 

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जंगली फलों में पोषक तत्व 

फल- पोषक तत्व 

काफल- अन्य फलों की अपेक्षा 10 गुना ज्यादा विटामिन सी 

अमेस- विटामिन सी 

खुबानी-विटामिन सी, एंटी ऑक्सीडेंट 

आंवला-विटामिन सी, एंटी ऑक्सीडेंट 

तिमला- विटामिन से भरपूर 

बेडू- विटामिन से लबरेज 

हेस्को संस्था के पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी का कहना है कि उत्तराखंड में पाए जाने वाले जंगली फल पौष्टिकता की खान हैं। लिहाजा, अब वक्त आ गया है कि इन फलों को पर्याप्त महत्व दिया जाए। न सिर्फ जंगली फलों की गुणवत्ता विकसित कर इनकी खेती की जाए बल्कि मिशन मोड में कार्ययोजना भी तैयार करने की जरूरत है। जंगली फलों को क्रॉप का दर्जा भी मिलना चाहिए।

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Posted By: Raksha Panthari

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