देहरादून, रक्षा पांथरी। स्‍वाद एवं पौष्टिकता से लबरेज पहाड़ की एक ऐसी दाल, जो औषधीय गुणों से भरपूर तो है ही, इससे अनेक प्रकार के लजीज व्यंजन भी तैयार होते हैं। इस दाल का नाम है गौथ यानी गहथ। कुछ जगह इसे कुलथ, कुर्थी या कुलथी भी कहा जाता है। बहुगुणी होने के कारण देहरादून, हल्द्वानी, दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई आदि शहरों में रह रहे प्रवासी तो गहथ की दाल को किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार रहते हैं। गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों के दौरान इसकी डिमांड खासी बढ़ जाती है। ..तो आइए! जानते हैं, पहाड़ी जनमानस किस-किस तरह से गहथ की दाल को प्रयोग में लाता है। 

दाल 

गहथ की दाल बेहद स्वादिष्ट होती है और इसे बनाने का तरीका भी बेहद आसान है। सबसे पहले गहथ को धोकर उसे भिगोने के लिए रख दें और फिर उबाल लें। इस बीच प्याज, टमाटर व धनिया काटकर रख लें। अब कड़ाही या प्रेशर में तेल गर्म कर उसमें जीरे का तड़का लगाएं और फिर उसमें प्याज-टमाटर मिलाकर अच्छी तरह भून लें। साथ ही स्वादानुसार जरूरी मसाले भी मिला लें। अब उबली हुई गहथ को इसमें मिक्स कर लें। इस बात का ध्यान रखें कि ग्रेवी के लिए गहथ के पानी का ही इस्तेमाल करें। यहां यह बताना भी जरूरी है कि लोहे की कड़ाही में पकाने से इस दाल का स्वाद और बढ़ जाता है।

पटूड़ी (पटोड़ी)

पटूड़ी को आप चाय के साथ स्नेक्स की तरह भी ले सकते हैं। पटूड़ी बनाने के लिए आपको गहथ को भिगोकर रखना होगा। इसके बाद हरी मिर्च को बारीक काट लें। अब भीगी दाल को सिलबट्टे में पीसकर इस पेस्ट के साथ कटी मिर्च, नमक, हल्दी और हल्के मसाले मिक्स कर लें। जब आपका मिश्रण तैयार हो जाए तो तवे को गर्म कर उस पर तेल डालकर फैला लें। इस तेल पर मिश्रण को गोलाई में फैला लें और उसे धीमी आंच पर पकाएं। जब एक हिस्सा पूरी तरह से पक जाए तो उसे पलट लें।

गहथ के भरवां पराठे

गहथ के भरवां पराठे बनाने के दो तरीके हैं। कुछ लोग कच्चे गहथ (भीगे हुए) के पराठे पसंद करते हैं तो कुछ उबले हुए गहथ के पराठे। कच्चे गहथ के भरवां पराठे बनाने के लिए सबसे पहले भीगी हुई गहथ को सिलबट्टे या मिक्सी में पीस लें। इसके बाद मिश्रण में स्वादानुसार नमक, मसाले और थोड़ा-सा आमचूर पाउडर मिला लें। फिर आटे की गोली में मिश्रण को भरकर भरवां पराठे बना लें। जबकि, उबले हुए गहथ के भरवां पराठे बनाने के लिए आपको गहथ को धोकर भिगोने के बजाय उबालना होता है। बाकी प्रक्रिया उपरोक्तानुसार ही है।

औषधीय गुणों की खान

गहथ तीन पत्तियों वाला पौधा है। इसके बीज में प्रोटीन व कॉबरेहाइड्रेट की मात्र अधिक होती है। इसका उपयोग औषधि के रूप में भी होता है। इसके सौ ग्राम बीज में प्रोटीन 22 ग्राम, कॉबरेहाइड्रेट 57.3 ग्राम, फाइबर 5.3 ग्राम, आयरन 7.6 मिलीग्राम, कैरोटीन 11.9 ग्राम, मैग्नीज 37 मिलीग्राम, फॉस्फोरस 0.39 मिलीग्राम, कॉपर 19 मिलीग्राम और जिंक 0.28 मिलीग्राम तक पाया जाता है। गुर्दे और मूत्रशय की पथरी को खत्म करने में भी गहथ रामबाण औषधि है।

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फाणू

फाणू गहथ की दाल को पीसकर बनाया जाता है, जो खाने में बेहद ही स्वादिष्ट होता है। इसके लिए गहथ को रात में भिगोकर रख दें और अगले दिन इसे सिलबट्टे या मिक्सी में पीस लें। इसके बाद प्याज, टमाटर व धनिया काटकर रख लें और अलग से लहसुन का पेस्ट बना लें। फिर लोहे की कड़ाही में तेल गर्म कर उसमें जख्या का तड़का लगाने के बाद कटी हुई सामग्री और लहसुन का पेस्ट मिक्स कर लें। अब स्वादानुसार नमक और अन्य मसाले इसमें मिला लें। साथ ही पिसी गहथ को भी कड़ाही में डाल लें और कुछ देर तक धीरे-धीरे करछी से हिलाते रहें।

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गथ्वाणी

भरवां रोटी बनाने के दौरान आप गथ्वाणी भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए उबाले गए गहथ का पानी अलग निकालकर रख लें। साथ ही थोड़ा पिसा हुआ मसाला भी तैयार कर लें। इस मसाले और गहथ के उबले पानी को छौंक के साथ दाल के रूप में तैयार कर लें।

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Posted By: Sunil Negi

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