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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भाजपा युवा मोर्चा के देहरादून जिला मंडलों की कार्यकारिणी निरस्त

By Sunil NegiEdited By:
Published: Fri, 19 Feb 2021 01:34 PM (IST)

भाजपा युवा मोर्चा के देहरादून जिला मंडलों की कार्यकारिणी निरस्त कर दी गई है। जिला अध्यक्ष शमशेर सिंह पुंडीर ने ...और पढ़ें

भाजपा युवा मोर्चा के देहरादून जिला मंडलों की कार्यकारिणी निरस्त कर दी गई है।
भाजपा युवा मोर्चा के देहरादून जिला मंडलों की कार्यकारिणी निरस्त कर दी गई है।

जागरण संवाददाता, देहरादून। भाजपा युवा मोर्चा के देहरादून जिला मंडलों की कार्यकारिणी निरस्त कर दी गई है। जिला अध्यक्ष शमशेर सिंह पुंडीर ने इसके आदेश जारी किए हैं। उनके इस कदम के पीछे सहमति के बिना कार्यकारिणी नियुक्त किया जाना बताया जा रहा है। भाजपा की इकाइयों में कार्यकारिणी को लेकर गतिरोध सामने आ रहा है। यहां युवा मोर्चा के महानगर मंडलों की कार्यकारिणी में पहले ही विरोध के स्वर उठ चुके थे। अब जिला मंडल कार्यकारिणी के चयन पर भी सवाल उठ गए हैं। वह भी खुद जिला अध्यक्ष शमशेर सिंह पुंडीर ने यह सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने कार्यकारिणी के चयन में अनदेखी किए जाने पर सभी 16 मंडलों की कार्यकारिणी को निरस्त कर दिया है। 

आदेश जारी कर उन्होंने बताया कि पुन: विचार-विमर्श के बाद ही सभी मंडलों के पदाधिकारियों को नियुक्त किया जाएगा। देहरादून में युवा मोर्चा के कुल 31 मंडल हैं। जिनमें से 15 महानगर के तहत और 16 जिले के तहत आते हैं। अभी ज्यादातर मंडलों में महज अध्यक्षों की घोषणा की गई थी। जबकि, महामंत्री, उपाध्यक्ष समेत अन्य पदों पर चयन प्रक्रिया जारी थी। सूत्रों की मानें तो जिले के तहत आने वाले मंडलों में प्रदेश पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के चलते मनमाफिक चयन किए जा रहे थे। चयन में जिला अध्यक्ष की राय न लिए जाने से शमशेर सिंह पुंडीर खफा बताए जा रहे थे। इसी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है।

जिला और महानगर पदाधिकारियों से राय-मशविरा नहीं

भाजपा की इकाइयों में जिला और महानगर के पदाधिकारियों से राय न लिए जाने की भी चर्चा है। सियासी गलियारों में प्रदेश पदाधिकारियों के छोटी इकाइयों में हस्तक्षेप की बातें की जा रही हैं। कार्यकारिणी के सदस्यों के चयन में भी बिना महानगर व जिला पदाधिकारियों की राय लिए घोषणा की जा रही है। इसी को देखते हुए कुछ कार्यकर्त्‍ता गुपचुप तरीके से विरोध भी करने लगे हैं।

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