देहरादून, राज्य ब्यूरो। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत इन दिनों खासे क्षुब्ध हैं। बतौर मुख्यमंत्री उनके फैसलों पर उठाई जा रही अंगुली और उनके खासमखास करीबियों के अब उनसे दूर खिंचते चले जाने को लेकर जिसतरह उन्हें निशाने पर लिया जा रहा है, सोशल मीडिया पर उन्होंने जवाबी अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। 

गौरतलब है कि बतौर मुख्यमंत्री उनके फैसले और उनकी नीतियों को लेकर हरीश रावत की पार्टी के भीतर एक तबका हमेशा आलोचक की तरह रहा है। इस तबके में अब वे लोग भी शामिल नजर आ रहे हैं, जिन्हें कभी उनका खासमखास कहा जाता था। 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व विधायक रणजीत रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को कभी हरीश रावत के खास करीबियों में शुमार किया जाता था। अब कई करीबी उनसे छिटक तो गए ही हैं, गाहे-बगाहे उन पर निशाना साधने से चूक नहीं रहे हैं। 

शुक्रवार को फेसबुक वाल पर हरीश रावत की यही पीड़ा झलकी। उन्होंने कहा कि-क्या मैं इतना लाचार दिखता हूं कि कोई मेरे स्थान पर निर्णय ले सके या सरकार चलाए। अपने अच्छे या बुरे निर्णयों के लिए मैं ही उत्तरदायी हूं। हां कुछ पराक्रमी और मेहनती लोग होते हैं, हर हालात व हर व्यक्ति के साथ अपना पराक्रम दिखाते हैं। ऐसे सारे पराक्रमियों को मेरी शुभकामनाएं। 

साथ ही उन्होंने कहा कि मैं अब कमजोर होता हुए व्यक्ति हूं। मकान का लकड़ी का बीम जिसको हमारे गांव में भराड़ा कहते हैं, जब कमजोर पड़ जाता है। न चाहते हुए भी उसको हटाना पड़ जाता है, जलाना पड़ता है। रहा प्रश्न मेरा तो मैं गुनगुना रहा हूं-रहिमन धागा प्रेम का, खूब जतन कर पाए, बटत बटत कुछ जुड़ी हैं, तो टूटत भी न टूट पाए।

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