देहरादून, राज्य ब्यूरो। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित सरकारी आवास के किराये का भुगतान बाजार दर के बजाय सरकारी दर से करना होगा। हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार दर से सरकारी आवास का किराया भुगतान करने के आदेश दिए थे। सरकार ने अध्यादेश जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को ये राहत दी है। 

सरकारी आवास के किराये का निर्धारण सरकार करेगी। वहीं आवास के बिजली, जल मूल्य व सीवर शुल्क आदि का भुगतान आवंटन की तिथि से पूर्व मुख्यमंत्री करेंगे। वाहन, चालक, विशेष कार्याधिकारी या जनसंपर्क अधिकारी, टेलीफोन समेत कई सुविधाएं मुफ्त रहेंगी। खास बात ये है कि ये सभी सुविधाएं राज्य गठन के बाद से 31 मार्च, 2019 तक ही मिलेंगी। 

यानी वर्तमान में कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री आवास समेत किसी भी सरकारी सुविधा का उपयोग नहीं कर सकेगा। उत्तराखंड भूतपूर्व मुख्यमंत्री (आवासीय एवं अन्य सुविधाएं) अध्यादेश, 2019 की अधिसूचना जारी कर दी गई है। अध्यादेश को बीती 13 अगस्त को मंत्रिमंडल ने गुपचुप तरीके से मंजूरी दी थी। 

अब तक के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा देने के लिए उक्त अध्यादेश को राज्य गठन की तिथि नौ नवंबर, 2000 से लागू किया गया है। यह अध्यादेश उन्हीं पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू होगा, जिन्हें राज्य सरकार ने सरकारी आवास आवंटित किए हैं। 

अध्यादेश के जरिये पूर्व मुख्यमंत्रियों को बहाल की गई तमाम सुविधाओं का लाभ 31 मार्च, 2019 तक ही मिलेगा। इसके बाद कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी आवास के साथ अन्य दी गई सुविधाओं का हकदार नहीं होगा। अध्यादेश के संशोधित स्वरूप से यह भी स्पष्ट हो गया कि राजभवन ने भी इस मामले में सरकार को पूर्व मुख्यमंत्रियों को ज्यादा रियायत देने से कदम पीछे खींचने को मजबूर किया है। 

अध्यादेश में इन सुविधाओं का जिक्र

भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित सरकारी आवास का किराया सरकार की ओर से निर्धारित दर से देना होगा। 

-सरकारी आवास के बिजली, जल मूल्य व सीवर शुल्क आदि का भुगतान भी आवंटन की तिथि से पूर्व मुख्यमंत्रियों को करना होगा। 

-चालक समेत वाहन, वाहनों में अनुरक्षण कार्य, वैयक्तिक सहायक या विशेष कार्याधिकारी या जनसंपर्क अधिकारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार, माली, टेलीफोन अटेंडेंट व सुरक्षा गार्ड की मुफ्त सुविधा। 

-सुरक्षा गार्ड को छोड़कर सभी सुविधाएं सरकारी आवास में रहने की तिथि तक मंजूर होंगी। 

-सरकारी आवास में समय-समय पर कराए गए मरम्मत कार्य का खर्च राज्य सरकार खुद उठाएगी। 

अदालत में देंगे चुनौती 

याचिकाकर्ता पद्मश्री अवधेश कौशल के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्रियों को किसी भी तरह की सुविधाएं दिए जाने के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा दे रही है। इस मामले में जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल की जा चुकी है। यह अध्यादेश निरस्त होना तय है।

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पूर्व मुख्यमंत्रियों पर इस तरह बकाया है धनराशि 

नारायणदत्त तिवारी-1.12 करोड़। 

बीएस कोश्यारी-47.57 लाख। 

बीसी खंडूड़ी-46.95 लाख। 

रमेश पोखरियाल निशंक-41.64। 

लाख विजय बहुगुणा-37.50 लाख।

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