देहरादून, जेएनएन। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में 30 फीसद कटौती को अभिभावकों और छात्रों ने वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर पहल बताया है। हालांकि, छात्र-छात्रओं को सीबीएसई की यह छूट सिर्फ परीक्षा में ही मिलेगी। स्कूलों में पूरा पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा।

प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप और डेवलपिंग स्कूल्स उत्तराखंड के अध्यक्ष समरजीत सिंह ने बताया कि सीबीएसई ने पाठ्यक्रम में 30 फीसद कटौती का आधिकारिक सकरुलर जारी कर दिया है। लेकिन, स्कूलों में बच्चों को पूरा पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। जिससे उन्हें आगे की कक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग, एनडीए आदि में परेशानी का सामना न करना पड़े। परीक्षा में छात्रों से 70 फीसद पाठ्यक्रम से ही सवाल पूछे जाएंगे। जो पाठ्यक्रम परीक्षा में शामिल नहीं होगा, उसकी जानकारी छात्रों को दी जाएगी। बताया कि जो पाठ्यक्रम हटाया गया है, उसमें से कई टॉपिक स्कूलों में पढ़ाए जा चुके हैं।

सरकारी स्कूलों पर समीक्षा के बाद होगा फैसला

सीबीएसई की तरह प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भी एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लागू हैं। निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौनसारी ने बताया कि एनसीईआरटी से कटौती किए गए पाठ्यक्रम की कॉपी मांगी गई है। समीक्षा के बाद प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए भी पाठ्यक्रम जारी किया जाएगा।

छाया खन्ना (अध्यक्ष, सीबीएसई सहोदय स्कूल्स कॉम्पलेक्स) का कहना है कि सीबीएसई ने पाठ्यक्रम घटाकर छात्रों को बड़ी राहत दी है। इससे छात्रों पर परीक्षा में ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। शिक्षक अपने स्तर से भी इस बात का पूरा ध्यान रख रहे हैं कि बच्चों पर बोझ न पड़े।

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आरिफ खान (राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट राइट्स) का कहना है कि सीबीएसई ने पाठ्यक्रम में कटौती कर छात्रों के साथ अभिभावकों को भी बड़ी राहत दी है। उम्मीद है सीआइएससीई भी जल्द ही पाठ्यक्रम घटा देगी।

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