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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कोरोना काल के सबक भूले, नहीं दिख रही एहतियात; कहीं महाराष्ट्र जैसे हालात न पैदा कर दे ये बेफिक्री

By Sunil NegiEdited By:
Published: Sat, 20 Feb 2021 09:12 AM (IST)

दूनवासियों ने कोरोना वायरस को खुद से दूर रखने के लिए जो सजगता शुरू में दिखाई थी वह अब गायब ...और पढ़ें

गढ़ी कैंट स्थित टपकेश्वर मंदिर रोड स्थित सरकारी सस्ते-गल्ले की दुकान में राशन लेने के लिए पहुंचे उपभोक्ता।
गढ़ी कैंट स्थित टपकेश्वर मंदिर रोड स्थित सरकारी सस्ते-गल्ले की दुकान में राशन लेने के लिए पहुंचे उपभोक्ता।

जागरण संवाददाता, देहरादून। दूनवासियों ने कोरोना वायरस को खुद से दूर रखने के लिए जो सजगता शुरू में दिखाई थी, वह अब गायब होती जा रही है। कोरोना संक्रमण के मामले कम होते ही सारी एहतियात तार-तार हो गई और लोग कोरोनाकाल के सबक भूलने लगे हैं। अब न तो चेहरे पर मास्क दिख रहा है और न शारीरिक दूरी के नियम का ही पालन किया जा रहा है। डर इस बात का है कि दूनवासियों की ये बेपरवाही कहीं शहर में भी महाराष्ट्र जैसे हालात न पैदा कर दे।

उत्तराखंड में कोरोना का पहला मामला 15 मार्च को सामने आया था। तब से अब तक 11 माह के इस अंतराल में प्रदेश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। सितंबर-अक्टूबर में यहां कोरोना चरम पर रहा। अब मामलों में खासी गिरावट आ गई है और प्रदेश सुकून की ओर बढ़ रहा है। लेकिन, इसका एक पक्ष और भी है। मामले कम होने से लोग बेफिक्र और बेखौफ होने लगे हैं। 

कोरोना से सुरक्षा और बचाव के लिए बनाए गए नियम-कायदे बाजार, सार्वजनिक परिवहन, शादी समारोह, सामूहिक आयोजनों में एक-एक कर टूटते जा रहे हैं। बाजार में न तो दुकानदार मास्क पहने दिख रहे हैं और न ही ग्राहक। सिटी बस, विक्रम आदि में सवारियां खचाखच भरी हैं और अधिकांश सवारियों के चेहरे से मास्क नदारद है। लोग ऐसे व्यवहार कर रहे हैं कि मानो कोरोना खत्म हो गया। उन्हें लगने लगा है कि इस महामारी से बाहर आ गए हैं और अब कुछ नहीं होगा। गौर करने वाली बात है कि यही सोच महाराष्ट्र पर भारी पड़ रही है।

 सिस्टम की सुस्ती और आमजन की लापरवाही के कारण वहां कोरोना की नई लहर आ गई है। कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण महाराष्ट्र के तीन जिलों में दोबारा लॉकडाउन तक लगाना पड़ा है। ऐसे में जरूरी है कि हम इसे लेकर संजीदगी दिखाएं।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनूप कुमार डिमरी का कहना है कि कोरोना के खिलाफ इस जंग में हमारा रवैया भी बहुत अहमियत रखता है। पिछले कुछ वक्त से कोरोना के मामलों में कमी जरूर आई है, पर यह खत्म नहीं हुआ है। मास्क, सैनिटाइजेशन, सामाजिक दूरी आदि को अपने व्यवहार में शामिल रखें। खुद के लिए, परिवार के लिए और समाज के लिए पूरी सतर्कता बरतें।

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