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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शोध परिणामों की प्रस्तुति मौलिक रूप में हो: प्रो. डीके नौरियाल

By Sunil NegiEdited By:
Published: Thu, 28 Nov 2019 05:39 PM (IST)Updated: Fri, 29 Nov 2019 07:28 AM (IST)

आइआइटी रुड़की के आचार्य प्रो. डीके नौरियाल ने कहा कि शोधार्थियों को शोध के विषय का चयन करते समय कोशिश करनी चाहिए कि उनका विषय मौलिक हो।

शोध परिणामों की प्रस्तुति मौलिक रूप में हो: प्रो. डीके नौरियाल
शोध परिणामों की प्रस्तुति मौलिक रूप में हो: प्रो. डीके नौरियाल

देहरादून, जेएनएन। शोधार्थियों को शोध के विषय का चयन करते समय कोशिश करनी चाहिए कि उनका विषय मौलिक हो। इसके लिए उस विषयवस्तु का विस्तार से अध्ययन जरूरी है। क्योंकि बगैर अध्ययन के मौलिक विषय वस्तु का चयन कर पाना संभव नहीं हो पाता। ये बातें दून विश्वविद्यालय की रिसर्च मैथोडोलॉजी राष्ट्रीय कार्यशाला के अंतिम दिन मुख्य अतिथि कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति व आइआइटी रुड़की के आचार्य प्रो. डीके नौरियाल ने कहीं।

दून विवि के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की ओर से आयोजित 10 दिवसीय कार्यशाला का बुधवार को समापन हो गया। इस दौरान प्रो. नौरियाल ने कहा कि यह कार्यशाला शोधार्थियों को उनके शोधपत्रों व शोधग्रंथों के लेखन में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने शोध परिणामों के प्रस्तुतिकरण में सरल भाषा और उचित शब्दों के समन्वय पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि गुरुकुल कांगड़ी विवि के प्रो. वीके सिंह ने कहा कि किसी भी शोध मॉडल के परीक्षण से पहले उस मॉडल पर परिकल्पना तैयार की जाए, तभी वास्तविक शोध संचालित हो पाएगा। सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी के प्रो. एचएस दास ने कहा कि शोधार्थियों को कॉपी-पेस्ट से इतर मूल कार्य संपादित करने पर ध्यान देना चाहिए। इस अवसर पर विवि के प्राध्यापक डॉ. सुधांशु जोशी की पुस्तक 'सस्टेनेबेल सप्लाई चैन कैपेबिलिटीज ऑफ माइक्रो, स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज' का विमोचन किया गया। इस मौके पर डॉ. प्राची पाठक, नरेंद्र लाल, डॉ. सुधांशु जोशी, डॉ. रीना सिंह, डॉ. वैशाली आदि मौजूद रहे।

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शोध व शिक्षण की गुणवत्ता अहम: वीसी

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए विवि के कुलपति डॉ. सीएस नौटियाल ने कहा कि विवि में शोध व शिक्षण की गुणवत्ता के लिए हम प्रयत्नशील हैं। हमारी कोशिश है कि विद्यार्थियों को अध्ययन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह कार्यशाला प्रतिभागियों व विवि के शोधार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. एचसी पुरोहित ने 10 दिवसीय कार्यशाला की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की।

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