देहरादून, जेएनएन। लॉकडाउन के दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी तरह का काम-धंधा बंद है। ऐसे में जो लोग रोजाना की दिहाड़ी पर काम करते थे, उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों के लिए सरकार ने निश्चित भत्ता देना शुरू कर दिया है। मगर, जो श्रमिक पंजीकृत नहीं है, उनके राशन का इंतजाम जिला प्रशासन अपने स्तर पर कर रहा है। इसकी जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी निकिता खंडेलवाल को दी गई है।

मुख्य विकास अधिकारी खंडलेवाल ने बताया कि श्रम विभाग से प्राप्त सूची के मुताबिक अभी जिलेभर में 2700 श्रमिकों का पता चला है। तहसील स्तर से इनका सत्यापन कराया जा रहा है। क्योंकि ऐसे श्रमिकों की संख्या अधिक भी हो सकती है। इसके साथ-साथ श्रमिकों को 15 दिन तक के हिसाब से आटा-चावल व अन्य सामग्री बांटने का काम शुरू कर दिया गया है। 

पहले दिन 70 से अधिक श्रमिकों को राशन का वितरण किया गया। सीडीओ ने बताया कि सिर्फ वास्तविक दैनिक श्रमिकों को ही राशन दिया जा रहा है। श्रमिकों की मदद करने के इच्छुक लोगों से भी सहयोग करने की अपील की।

वितरित होने वाला राशन

पांच किलो आटा, तीन किलो चावल, एक किलो दाल, एक किलो नमक, एक किलो चीनी, तेल, हल्दी व आवश्यक मसाले आदि।

छात्रों को तैयार भोजन कराएगा प्रशासन

जिला प्रशासन ने भोजन बनाने में असमर्थ छात्र-छात्रओं व बुजुर्ग लोगों को पका हुआ भोजन परोसने का काम शुरू कर दिया है। मुख्य विकास अधिकारी निकिता खंडेलवाल ने बताया कि अब तक 48 छात्रों ने भोजन की मांग की है। इन छात्र-छात्रओं को दून यूनिवर्सिटी के पास शिवा वेडिंग प्वाइंट का अधिग्रहण कर शिफ्ट किया जा रहा है, ताकि एक स्थल पर आसानी से भोजन भेजा जा सके। 

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इसके अलावा दो वरिष्ठ नागरिकों की मांग भी प्रशासन के पास आई है। इन्हें भी पके भोजन की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। भोजन का वितरण मुफ्त में किया जा रहा है, जबकि वेडिंग प्वाइंट स्वामी को सरकारी दर पर भुगतान किया जाएगा।

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Posted By: Bhanu Prakash Sharma

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