उत्तराखंड में दूरस्थ शिक्षा जल्द होगी विद्यार्थियों के करीब, जानिए कैसे
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा को विद्यार्थियों के करीब लाने की कोशिश में है। विवि की ओर से दूरस्थ शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
देहरादून, जेएनएन। प्रदेश में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा को विद्यार्थियों के करीब लाने की कोशिश में है। विवि की ओर से जो कोशिशें की जा रही हैं, वह न केवल सार्थक हैं, बल्कि कामकाजी महिलाओं के लिए सर्वाधिक उपयोगी भी हैं। विवि की ओर से दूरस्थ शिक्षा (डिस्टेंस एजूकेशन) को और अधिक प्रभावी और गुणवत्तापरक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
विवि यह मिथक तोड़ना चाहता है कि यूओयू केवल डिग्री बांटने तक ही सीमित नहीं। इसीलिए विवि ने अपने सभी ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को न केवल अपग्रेड किया है, बल्कि नए सिलेबस को भी इसमें शामिल किया है। ताकि विद्यार्थी डिग्री लेने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी कर सकें। प्रदेश के सभी विवि से प्राइवेट परीक्षा प्रणाली समाप्त होने के बाद से उत्तराखंड मुक्त विवि की उपयोगिता बढ़ गई है। यहां वर्तमान सत्र तक साठ हजार से अधिक छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं।
कॉलेजों में व्यवसायिक पाठ्यक्रम
प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में व्यवसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल स्वागतयोग्य है। लेकिन तीन हजार से अधिक छात्र संख्या वाले सरकारी कॉलेजों में ही ये पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे। यह नियम राज्य की भौगोलिक परिस्थिति के अनुरूप नहीं है। बजट सत्र के दौरान सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय गढ़वाल मंडल के एक मात्र राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार पर हर लागू होता है। क्योंकि यहां छात्रों की संख्या तीन हजार से अधिक है। यदि सरकार दो हजार छात्र संख्या वाले सरकारी कॉलेजों को इस नियम के दायरे में लाए तो श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि से संबद्ध करीब एक दर्जन डिग्री कॉलेजों में व्यवसायिक पाठ्यक्रम शुरू हो सकते हैं। इससे पहाड़ी जिलों में जहां के छात्र-छात्राएं अपने घर के नजदीक सरकारी फीस में व्यवसायिक कोर्स की पढ़ाई कर पाते। फिर व्यवसायिक शिक्षा में दक्ष विद्यार्थी अपने घर के आसपास ही स्वरोजगार शुरू करते और पलायन को थामने में भी मददगार होते।
निदेशक प्रभारी, सवाल भारी
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) से संबद्ध महिला प्रौद्योगिकी संस्थान (डब्ल्यूआइटी) का विवादों से चोली दामन का साथ रहा है। पहले करीब पांच साल तक संस्थान की निवर्तमान निदेशक डॉ.अलकनंदा अशोक विवादों में घिरी रहीं। संस्थान के संविदा कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच कई बार संस्थान परिसर रण का मैदान बना।
डॉ.अलकनंदा अशोक के पद से त्याग पत्र देने के बाद शासन ने डॉ. गोविंद वल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर के डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन के प्रो. आरपीएस गंगवार को दून स्थित डब्ल्यूआइटी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया है। लेकिन प्रभारी निदेशक के खिलाफ नैनीताल स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के एक इंजीनियर चंद्रप्रकाश ने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने उसकी शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, एमएचआरडी, प्रदेश विजिलेंस समेत 21 उच्चाधिकारियों से की है और उनकी पूरी जांच करवाने का आग्रह किया है। अब देखना है कि यूटीयू प्रबंधन अपने स्तर से क्या करवाई करता है।
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शिक्षा पर कोरोना डंक
दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस ने उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था पर ऐसा डंक मारा कि पूरी शिक्षा व्यवस्था थम गई है। विद्यालयी से लेकर उच्च शिक्षा संस्थान बंद पड़े हैं। मार्च-अप्रैल का महीना परीक्षा से लेकर दाखिले का महत्वपूर्ण समय माना जाता है, लेकिन छात्र-छात्राएं घरों में कैद हैं। कोचिंग संस्थान बंद हो चुके हैं। जिससे विद्यार्थियों को घर पर ही स्वयं की तैयारी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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कोरोना का आतंक कब तक रहता है, यह किसी को मालूम नहीं। ऐसे में पढ़ाई से अधिक स्वास्थ रहना सभी के लिए बड़ी चुनौती है। सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों के हास्टल तक खाली करवा दिए गए हैं। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वह अपने-अपने घरों में ही रहें और तैयारी करें। यदि किसी को पाठ्यक्रम की जरूरत महसूस होती है तो वह मोबाइल या इंटरनेट के जरिये दोस्तों और शिक्षकों से जानकारी ले सकते हैं।
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