देहरादून, [जेएनएन]: उत्तराखंड में डेंगू के मरीजों की संख्या में अब इजाफा होने लगा है। खासकर मैदानी इलाकों में डेंगू का प्रकोप ज्यादा देखने को मिल रहा है। दो और मरीजों की एलाइजा जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें एक मरीज विकासनगर और एक सोलन हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है। हालांकि, दोनों की ही सेहत में सुधार है। एक मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। 

जिला वीबीडी अधिकारी सुभाष जोशी ने बताया कि विकासनगर का रहने वाला 26 वर्षीय युवक अहमदाबाद में नौकरी करता है। कुछ दिन पहले वहीं उसकी तबीयत खराब हो गई। परिजनों ने 23 अगस्त को उसे हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट में भर्ती कराया था। वहां हुए रेपिड टेस्ट में डेंगू के लक्षण दिखाई दिए। 

इसके बाद उसका 29 अगस्त को ब्लड सैंपल भेजकर एलाइजा जांच कराई गई, जिसमें डेंगू की पुष्टि हुई। हालांकि उपचार के बाद ठीक होने पर युवक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं हिमाचल प्रदेश के सोलन निवासी 32 वर्षीय युवक को 26 अगस्त को परिजनों ने कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया, जहां एलाइजा जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है।

जोशी ने बताया कि युवक का हालत अभी ठीक है। उसकी प्लेट्लेट्स बढ़ रही हैं। डेंगू के मामले बढ़ते देख शहर में दवाई का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके अलावा लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। 

प्रदेश में इलाज कराने वालों का डाटा होगा तैयार

स्वास्थ्य महकमा अब प्रदेश में इलाज कराने वाले सभी मरीजों का डाटा तैयार करने की तैयारी कर रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण सरकारी योजनाओं के लिए तैयार हो रहे डाटा और निजी सर्वे के जरिये सामने आ रहे डाटा का मिलान न हो पाना है। 

इस डाटा के जरिये यह तय किया जा सकेगा कि प्रदेश के अस्पतालों में कितने प्रदेशवासियों और कितने अन्य प्रदेशों के लोगों ने इलाज कराया है। उत्तराखंड की सीमाओं से जुड़े अन्य प्रदेशों के लोग यहां के सरकारी अस्पताल में बड़ी संख्या में इलाज कराने आते हैं। 

इसका सबसे बड़ा उदाहरण देहरादून का दून अस्पताल रहा है। यहां सहारनपुर के साथ ही मुज़फ्फरनगर व बिजनौर तक के मरीज इलाज कराने आते हैं। सरकारी अस्पताल में इलाज कराने वालों की बकायदा रसीद कटती है लेकिन इसमें मरीज के रहने के स्थान का उल्लेख नहीं होता। 

ऐसे में यह देखा गया कि सरकारी योजनाओं का जब भी फील्ड सर्वे किया गया तब ये बातें सामने आई कि प्रदेश के बहुत कम लोगों ने इन योजनाओं का लाभ उठाया है जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा बिल्कुल अलग है। अन्य एजेंसियों द्वारा किए गए फील्ड सर्वे में उत्तराखंड कई योजनाओं में पिछड़ रहा था। 

जब इसका गहनता से अध्ययन किया गया तब यह बात सामने आई कि योजना का लाभ उत्तराखंड के साथ ही अन्य प्रदेशों के लोग भी उठा रहे हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य महकमा अन्य प्रदेशों से इलाज कराने आने वाले मरीजों का डाटा तैयार कर रहा है। 

इसका मकसद यह कि महकमा यह इंगित कर सके कि सरकारी अस्पतालों में वास्तिवक रूप से कितने लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया और इसमें उत्तराखंड और अन्य प्रदेशों के लाभार्थियों की संख्या कितनी है। इससे कुल लाभार्थियों की संख्या भी सही प्रकार से मिल सकेगी।

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Posted By: Bhanu