राज्य ब्यूरो, देहरादून। Covid 19 Vaccination कोविड-19 टीकाकरण से भागने वाले फ्रंटलाइन वर्कर की सरकार दोबारा सुध लेने जा रही है। ऐसे कार्मिकों के टीकाकरण की अलग से व्यवस्था के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा जा रहा है। पूरे देश के साथ ही उत्तराखंड में भी सबसे पहले कोरोना टीकाकरण की शुरुआत फ्रंटलाइन वर्कर से की गई थी। 

सरकार ने स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं समेत तमाम आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभागों के कर्मचारियों, कोविड केयर सेंटर, क्वारंटाइन सेंटर पर ड्यूटी में लगाए गए तमाम कार्मिकों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित कर टीकाकरण में उन्हें प्राथमिकता दी। बावजूद इसके इस सूची में ही ऐसे कार्मिकों की संख्या कम नहीं रही, जिन्होंने सबसे पहले टीकाकरण का फायदा नहीं उठाया। हालांकि अब सभी के लिए टीकाकरण प्रारंभ किया जा चुका है। 

बताया जा रहा है कि तमाम भ्रांतियों का शिकार होने की वजह से ये कार्मिक टीकाकरण से बच गए। अब कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने और स्वास्थ्य को हो रहे गंभीर खतरे को देखने के बाद ऐसे तमाम कार्मिकों में हड़कंप मचा है। अब इनकी ओर से अलग से टीकाकरण की मांग लगातार की जा रही है। अहम बात ये है कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए ड्यूटी पर लगाए गए शिक्षकों ने भी उसवक्त टीकाकरण का लाभ लेने से बचने की कोशिश की। अब कर्मचारियों और शिक्षकों के तमाम संगठनों की ओर से पहले टीकाकरण की मांग की जा रही है।

मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि टीकाकरण से शुरुआती दौर में कन्नी काटने की वजह से प्रदेश में तकरीबन 10 फीसद टीके बेकार हो गए। उन्होंने कहा कि फ्रंटलाइन वर्कर के लिए एक बार फिर अलग से टीकाकरण की मांग पर विचार किया जा रहा है। इस मामले में कार्रवाई केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ही होनी है। ऐसे में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर छूट गए फ्रंटलाइन वर्कर के लिए अलग से टीकाकरण की व्यवस्था की मांग की जा रही है।

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