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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 29, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

तालाब और नदी में जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस, जानिए और क्‍या कहते हैं विज्ञानी

By Sumit KumarEdited By:
Published: Sun, 29 Nov 2020 09:47 PM (IST)Updated: Mon, 30 Nov 2020 07:16 AM (IST)

कोविड-19 वायरस को लेकर देश-दुनिया में हो रहे शोध के बीच विज्ञानियों का एक और मत सामने आया है। मानना ...और पढ़ें

प्रदूषित जल में इस वायरस के सक्रिय रहने की संभावना कमजोर पड़ जाएगी।
प्रदूषित जल में इस वायरस के सक्रिय रहने की संभावना कमजोर पड़ जाएगी।

रुड़की,जेएनएन। कोविड-19 वायरस को लेकर देश-दुनिया में हो रहे शोध के बीच विज्ञानियों का एक और मत सामने आया है। उनका मानना है कि यह वायरस बहते हुए और रुके हुए साफ पानी में भी न केवल लंबे समय तक जीवित रह सकता है, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर का सफर भी तय कर सकता है। अलबत्ता, प्रदूषित जल में इस वायरस के सक्रिय रहने की संभावना कमजोर पड़ जाएगी। 

रुड़की स्थित राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआइएच) के पर्यावरणीय जल विज्ञान प्रभाग के विज्ञानी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि यद्यपि एनआइएच ने इस पर अभी तक कोई शोध नहीं किया है, लेकिन विश्वभर में चल रहे शोध यह साबित कर रहे हैं कि कोरोना वायरस नदी के पानी में भी जिंदा रह सकता है। डॉ. सिंह के अनुसार यदि कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति नदी अथवा तालाब में स्नान करेगा तो उसके जरिये वायरस पानी में आ सकता है। देश में विभिन्न पर्वों पर नदियों में होने वाले स्नान में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। 

डॉ. सिंह के मुताबिक इस वायरस के सफर की कोई सीमा नहीं है। अनुकूल परिस्थितियों में यह लंबे समय तक सक्रिय रहता है। यही नहीं, नदी के बहाव के साथ अंतिम छोर तक पहुंच सकता है। इस दौरान यह विकसित नहीं होगा, लेकिन सक्रिय रहेगा। मानव शरीर के संपर्क में आने पर यह अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देगा। दूसरी ओर, प्रदूषित पानी में वायरस के जिंदा रहने की संभावना कम रह जाती है। खासकर, जिन स्थानों पर नदी में बॉयो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर एक मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा होता है, तो वहां कोरोना वायरस के ङ्क्षजदा रहने की संभावना क्षीण हो जाएंगी।  जिस प्रकार साबुन अथवा सैनिटाइजर से हाथ धोने पर कोरोना वायरस को नष्ट हो जाता है, ठीक वैसे ही जहां पर प्रदूषित पानी में वायरस की सेल वॉल नष्ट हो जाती हैं। 

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गंगा के पानी के नमूनों पर लंबे समय से शोध कर रहे डॉ. सिह का मानना है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनने से हरिद्वार और उसके आसपास गंगा में प्रदूषण की समस्या कम हुई है। बीओडी का स्तर भी एक मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है, ऐसे में हरिद्वार में गंगा में इस वायरस जिंदा रहने की प्रबल संभावना है। चूंकि, इससे आगे गंगा में प्रदूषण की समस्या अधिक है ऐसे में वहां वायरस की सक्रियता कम नजर आ सकती है।  

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