जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। पिछले दो दिन से लगातार प्रदेश में दो हजार से ऊपर मामले आ रहे हैं। यही नहीं सक्रिय मामलों की संख्या भी साढ़े तेरह हजार के पार पहुंच गई है। सक्रिय मामलों की यह अब तक की सर्वाधिक संख्या है। जिस तेजी से मामले बढ़े हैं, चुनौतियों का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। फिलहाल चार ऐसी चुनौतियां हैं जिससे सिस्टम को पार पाना होगा। अन्यथा स्थिति विकट होती जाएगी। 

चुनौती-एक 

सिस्टम के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती दून बना हुआ है। जहां कोरोना के दैनिक मामलों में तेजी से इजाफा होता जा रहा है। यहां 1051 नए मामले आए हैं, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि जिले में संक्रमण दर भी तेजी से बढ़ रही है। आठ अप्रैल को संक्रमण दर 3.72 फीसद थी, जबकि शुक्रवार को यह 17 फीसद के करीब पहुंच गई। ताज्जुब इस बात का है कि बढ़ती संक्रमण दर के बावजूद जांच में सुस्ती दिख रही है। जिले में वर्तमान में छह हजार टेस्ट प्रतिदिन किए जा रहे हैं। जांच का दायरा बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है।

चुनौती-दो

कोरोना के लिहाज से दूसरी बड़ी चुनौती हरिद्वार जनपद हैं। कारण ये कि यहां जांच का लक्ष्य अब भी पूरा नहीं हुआ है। पिछले 16 दिन में हरिद्वार में 322404 जांच की गई हैं। यानी 20150 जांच प्रतिदिन। उच्च न्यायालय ने हर दिन 50 हजार जांच के निर्देश दिए थे, पर वर्तमान स्थिति में इसकी 40 फीसद ही जांच की जा रही है। चिंता इस बात की भी है कि यहां ज्यादातर एंटीजन टेस्ट किए जा रहे हैं। जिनकी प्रमाणिकता खासी कम है। 

चुनौती-तीन 

प्रदेश के पर्वतीय जिले भी अब चिंता बढ़ा रहे हैं। यहां जांच की रफ्तार खासी सुस्त है, पर संक्रमण दर किसी बड़े खतरे का संकेत दे रही है। इनमें आठ जिले ऐसे हैं, जहां शुक्रवार को पॉजिटिविटी दर पांच फीसद से ऊपर रही है। जबकि जांच बहुत सीमित संख्या में किए गए हैं। सात जिले ऐसे हैं जहां पांच सौ से भी कम जांच हुई हैं। यह स्थिति भविष्य के लिहाज से अच्छी नहीं है। प्रधानमंत्री जहां टेस्ट, ट्रैक व ट्रीट पर जोर दे रहे हैं, सिस्टम इसी से दूर भाग रहा है।

चुनौती-चार 

कोरोना के खिलाफ जंग में नैनीताल प्रशासन की सुस्ती भी समझ से परे हैं। यहां पिछले 16 दिन में 1829 नए मामले आए हैं। यानी सौ से ऊपर मामले हर दिन आ ही रहे हैं। पर इस दरमियान 16985 ही जांच की गई हैं। यानी हर दिन सिर्फ एक हजार जांच। जांच में इस तरह की सुस्ती या कहें लापरवाही आने वाले वक्त में दिक्कतें बढ़ा सकता है। 

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