देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: कांग्रेस करो या मरो का सबब बने नगर निकाय चुनाव में असंतुष्टों का समर्थन हासिल करने की अंतिम क्षण तक कोशिश करेगी। पार्टी की रणनीति मतदान की तिथि 18 नवंबर तक असंतुष्टों को मनाने की है, ताकि मतदान तक पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में उन्हें लाया जा सके। 

नगर निकाय चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर आंख दिखा रहे असंतुष्टों के मामले में कांग्रेस अलग अंदाज अपनाए हुए है। इस वजह से अपनों की बेरुखी को अंतिम दिन यानी मतदान तक बर्दाश्त किया जाएगा। इसके चलते अनुशासन के चाबुक को रोक दिया गया है। 

वहीं असंतुष्ट पार्टी प्रत्याशियों की मुश्किलें न बढ़ा पाएं, इसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर वरिष्ठ नेताओं की मदद ली जा रही है। ऐसे कई नेताओं को अंदरखाने पार्टी के खिलाफ चुनाव मैदान में खम ठोक रहे बागियों को मनाने का जिम्मा सौंपा गया है। 

निकाय चुनाव में प्रमुख प्रतिपक्ष यह कोशिश कर रहा है कि ताकत को किसी भी तरह एकजुट किया जाए। दरअसल, प्रचंड बहुमत से प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा को निकायों में चुनौती देने के लिए कांग्रेस सबको साथ लेकर चलने की नीति पर काम कर रही है। प्रत्याशियों के चयन में इस नीति पर काम किया गया। 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि पार्टी दिलों को जोड़ने पर ध्यान दे रही है। इसलिए टिकट नहीं मिलने से खफा रह गए कुछ साथियों को अंतिम क्षण तक साथ लेने की कोशिश की जाएगी। अलबत्ता, चुनाव के मौके पर पार्टी की छवि बिगाड़ने की कोशिशों पर सतर्कता भी बरती जा रही है। 

सोशल मीडिया पर टिकट वितरण को लेकर असंतोष जता चुके प्रदेश कांग्रेस संगठन सचिव संजय रावत के इस्तीफे को पार्टी ने तूल नहीं दिया। अलबत्ता, चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाने को लेकर गंभीर रुख अपनाने के संकेत भी हैं। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि चुनाव में वातावरण को दूषित करने वालों पर पार्टी सख्त कदम उठाने को बाध्य हो सकती है।

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Posted By: Bhanu

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