ऑल वेदर रोड पर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
ऑल वेदर रोड परियोजना में प्रदेश कांग्रेस को अब इसमें खोट नजर आ रहा है। कांग्रेस ने इस परियोजना को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है।
देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: चारधाम के लिए वर्षभर सुगम यातायात मुहैया कराने के मद्देनजर 11700 करोड़ की लागत वाली ऑल वेदर रोड परियोजना के रूप में केंद्र से उत्तराखंड को मिली सौगात भले ही तीर्थाटन, पर्यटन व सामरिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही हो, लेकिन प्रदेश कांग्रेस को अब इसमें खोट नजर आ रहा है। कांग्रेस ने इस परियोजना को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है।
कांग्रेस का आरोप है कि डबल लेन की इस सड़क के निर्माण में बड़े पैमाने पर पेड़ तो काटे ही जा रहे, पहाड़ कटान में भी परंपरागत तरीके अपनाए जा रहे हैं। साथ ही मलबे का सही ढंग से निस्तारण नहीं हो रहा। यह भी आरोप है कि केंद्र व राज्य के दबाव में लक्ष्य पूरा करने के लिए अहम सवालों की अनदेखी की जा रही है।
प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार ऑल वेदर रोड से प्रदेश को खासी उम्मीदें हैं। इससे जहां चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री एक-दूसरे से जुड़ेंगे, वहीं इस परियोजना का राष्ट्रीय व सामरिक महत्व भी है। सूबे के तीन जिले उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ चीन सीमा से सटे हैं।
इस लिहाज से उत्तरकाशी व चमोली तक ऑल वेदर रोड बनने से बड़े वाहनों की आवाजाही का मार्ग सुगम होगा। यही नहीं, चारधाम यात्रा यहां की आर्थिकी का बड़ा जरिया है। सड़क बनने से जहां यात्रा में मौसम बाधक नहीं बनेगा, वहीं वर्षभर यात्रा संचालित होने से बारह माह रोजगार के अवसर भी बने रहेंगे।
केंद्र की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर अब कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए इसके निर्माण में घपले की आशंका जताई है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने बयान जारी कर कहा कि डबल लेन की इस सड़क का अधिकांश भाग पर्वतीय क्षेत्र में है, जो भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है।
सीमांत क्षेत्रों में खड़ी ढाल के पहाड़ों पर 12 मीटर चौड़ी सड़क बनाने को सात मीटर कटान होगा। इसमें बड़े पैमाने पर पेड़ कटेंगे।
बिष्ट ने यह भी आरोप लगाया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए काश्तकारों को डरा-धमकाकर उनसे शपथपत्र लिए जा रहे हैं। सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीकी का प्रयोग करने की बजाए परंपरागत तरीके से पहाड़ कटान किया जा रहा है, जिससे भविष्य में नए भूस्खलन क्षेत्र विकसित होने से लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी।
उन्होंने कहा कि पेड़ कटान के एवज में पौधरोपण की भरपाई को दूसरे राज्यों में जगह तलाशी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय ठेकेदारों की बजाए बाहरी राज्यों की कंपनियों को कार्यदायी संस्था बनाया गया है।
आल वेदर रोड पर एक नजर
-लगभग 900 किमी लंबी इस परियोजना की लागत है 11700 करोड़
-परियोजना में 25 पुल, 13 बाइपास, तीन फ्लाईओवर व दो सुरंग का भी निर्माण
-डबल लेन की इस सड़क पर तीर्थ यात्रियों के लिए बनेंगे 28 सुविधा केंद्र
-इस राजमार्ग पर 154 बस बे व ट्रक बे का होगा निर्माण
-राजमार्ग पर 38 जगह बनेंगे लैंड स्लाइड जोन
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