देहरादून, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस समेत विपक्ष के विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से ईवीएम को लेकर प्रलाप को देश में अराजकता फैलाने का कुत्सित षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि यह जनता का अनादर और देश की पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया और देश के महान लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न लगाने का कुत्सित प्रयास है। वहीं मतगणना से पहले कांग्रेस नेताओं के बयानों और अधिकारियों को धमकाने पर भाजपा ने गहरी आपत्ति जताई है। सत्तारूढ़ दल ने कहा कि हार को देखकर कांग्रेस नेता बौखला रहे हैं और गैर लोकतांत्रिक हरकतों पर उतर आए हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईवीएम का विरोध देश की जनता के जनादेश का अनादर है। अपनी संभावित हार से बौखलाई 22 पार्टियां देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाकर विश्व में देश और अपने लोकतंत्र की छवि धूमिल कर रही है। इन सभी दलों की मांगों का कोई तार्किक आधार नहीं है। वे निजी स्वार्थ से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने तीन से ज्यादा जन हित याचिकाओं का संज्ञान लेने के बाद चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप स्वरूप दिया। इसमें हर विधानसभा क्षेत्र में पांच वीवीपैट को गिनने का आदेश दिया है। विपक्ष सर्वोच्च अदालत के आदेश पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। निहित स्वार्थ और पराजय को न मानने की मानसिकता के कारण विपक्ष चुनाव आयोग और देश के लोकतंत्र की छवि धूमिल कर रहा है। हम सब को प्रजातांत्रिक संस्थानों को और मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए। कांग्रेस की ओर से ईवीएम को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने और चुनाव प्रक्रिया पर अंगुली उठाने के बाद भाजपा ने पलटवार किया है। 

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रमुख डॉ देवेंद्र भसीन ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ईवीएम पर आपत्ति करने के साथ ही अधिकारियों को आतंकित करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों की भाजपा निंदा करती है। कांग्रेस नेताओं का यह कदम जाहिर कर रहा है कि उन्हें चुनाव में अपनी पराजय साफ दिखाई दे रही है। कुछ समय पहले राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व पंजाब कांग्रेस विजयी रही तो ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठाया गया। कांग्रेस जिसतरह संवैधानिक संस्थाओं पर प्रहार कर रही है, वह निंदनीय है। इससे कांग्रेस का अस्तित्व ही खतरे में पड़ने जा रहा है।

चुनाव रद करें, हो दोबारा मतदान: कांग्रेस

लोकसभा चुनाव के लिए मतगणना शुरू होने में अब महज कुछ ही घंटे शेष हैं, लेकिन ईवीएम से संपन्न हुई चुनाव प्रक्रिया पर कांग्रेस ने अविश्वास जताया है। राज्य में कुछ पोलिंग बूथों पर मॉक पोलिंग में पड़े मतों को वास्तविक मतदान से पहले नहीं हटाए जाने पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को सचिवालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या जावलकर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने 11 अप्रैल को चुनाव रद कर दोबारा मतदान कराने की मांग की है। 

उधर, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता नवप्रभात ने ईवीएम से चुनाव की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग को ईवीएम में खामियां को लेकर सियासी दलों की शंकाओं और संदेह को दूर करने के लिए कारगर और पारदर्शी पहल करनी चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दिए ज्ञापन में प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मॉक पोल वाली मशीनों में गंभीर चूक हुई है। इससे चुनाव की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्न लगा है। 

यह मात्र कुछ बूथों का मामला नहीं हैं, बल्कि ईवीएम से मॉक पोल का रिकॉर्ड नहीं हटाया जाना किसी बड़े षडयंत्र की ओर इशारा कर रहा है। यह आश्चर्यजनक है कि 11 अप्रैल को राज्य में पहले चरण में हुए मतदान के बावजूद 22 मई तक इस चूक के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर कोई भी कार्रवाई चुनाव आयोग ने नहीं की। लिहाजा राज्य में चुनाव रद कर पुनर्मतदान कराया जाए।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, मुख्य कार्यक्रम समन्वयक राजेंद्र शाह, प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी व डॉ आरपी रतूड़ी, महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा आदि शामिल थे। उधर, पूर्व मंत्री नवप्रभात ने कहा कि ईवीएम से चुनाव प्रक्रिया संदेह से परे नहीं है। ईवीएम मशीनों को इधर से उधर ले जाने, खराब होने पर बदलने समेत विभिन्न प्रक्रिया में गड़बड़ी का पूरा अंदेशा है। 

वर्ष 2009 और वर्ष 2017 में वह ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं। इस मामले में चुनाव आयोग को खुद पहल करते हुए शंका और शिकायतों के निवारण के लिए ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग को ज्ञापन भी भेजेंगे।

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