देहरादून, राज्य ब्यूरो। देवप्रयाग में शराब के बॉटलिंग प्लांट को लेकर सियासत और गरमा गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के विरोध पर उन्हें आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि हरीश रावत ऐसे व्यक्ति हैं जो पहले पौधा लगाते हैं और जब पौधा जड़ पकड़ता है तो वह उसे उखाड़ने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि जिस बॉटलिंग प्लांट को लेकर विरोध जताया जा रहा है, वह देवप्रयाग बाजार से 40 किमी और राष्ट्रीय राजमार्ग से आठ किमी की दूरी पर है। 

उत्तराखंड में इस समय देवप्रयाग में शराब के बॉटलिंग प्लांट को लेकर सियासत गरमाई हुई है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार पर हमलावर है। वहीं, सरकार ने इस मामले में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ही निशाने पर ले लिया है।

बॉटलिंग प्लांट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के विरोध को लेकर मंगलवार को मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हरीश रावत पहले पौधा लगाते हैं, जब वह जड़ पकड़ने लगता है और फल देने का काम करता है, तब वह उसे उखाड़कर फेंक देते हैं। 

उन्होंने कहा कि बॉटलिंग प्लांट की स्वीकृति पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार के समय में दी गई और निर्माण का काम भी शुरू हो गया था। इसके आगे के कार्य मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हुए। इसमें स्थानीय फलों का उपयोग किया जा रहा है। इससे यहां के लोगों को उनके उत्पाद का अच्छा मूल्य मिलेगा। जिस तरह कहा जा रहा है कि देवप्रयाग में बॉटलिंग प्लांट लग रहा है, ऐसा नहीं है। यह प्लांट देवप्रयाग बाजार से 40 किमी की दूरी पर स्थित है। 

30 दिसंबर 2016 को मिली थी बॉटलिंग प्लांट लगाने की अनुमति

देवप्रयाग में जिस बॉटलिंग प्लांट को लेकर इतना हंगामा मचा हुआ है उसे लगाने की अनुमति 30 दिसंबर 2016 को जारी की गई थी। इस आदेश में यह स्पष्ट लिखा है कि शासन द्वारा देवप्रयाग में बाटलिंग प्लांट के लिए एफएलएम-टू लाइसेंस दिए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह लाइसेंस अंग्रेजी शराब की भराई के लिए दिया जाता है। इस तरह के आदेश विभागीय मंत्री के अनुमोदन के पश्चात ही दिए जाते हैं।

वाइनरी में नहीं दिखाई किसी ने रुचि

प्रदेश में वाइनरी प्लांट लगाने की व्यवस्था आबकारी नीति में की गई थी। इसमें किसी भी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई। इस पर तत्कालीन सरकार ने मंडी परिषद को शराब के गोदाम के लिए लाइसेंस दिया था। यहां से बिकने वाली शराब पर वाइनरी लगाने के लिए को प्रतिपेटी शुल्क भी वसूला गया। बावजूद इसके प्रदेश में आज तक कोई भी वाइनरी नहीं लग पाई। 

उक्रांद ने कहा अनुबंध का हो अनुपाल

उत्तराखंड क्रांति दल ने देवप्रयाग के ग्राम डडवा मडोली में बॉटलिंग प्लांट खोलने के दौरान हुए अनुबंध के अनुपालन पर जोर दिया है। दल के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने कहा कि यहां प्लांट इस शर्त पर खोला गया था कि इसमें स्थानीय उत्पादों का प्रयोग होगा, स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा और स्थानीय स्तर पर इसका विक्रय नहीं किया जाएगा। 

अब प्लांट में उत्पादन शुरू होते ही यहां उत्पादित शराब स्थानीय ठेकों में बेची जा रही है, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने देवप्रयाग के ग्राम श्रीकोट मोल्डा में एनसीसी अकादमी खोलने की घोषणा को भी अमल में लाने की मांग की है। 

बॉटलिंग प्लांट मामले में बैकफुट पर कांग्रेस

भागीरथी और अलकनंदा के संगम देवप्रयाग क्षेत्र में शराब की बॉटलिंग प्लांट को लेकर विवाद के बाद कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा है। पिछली कांग्रेस सरकार में ही उक्त बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दिए जाने का आदेश दिया गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद पार्टी को आंदोलन से पीछे हटना पड़ा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि देवप्रयाग समेत गंगा नदी के किनारे क्षेत्र में शराब के बॉटलिंग प्लांट को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनकी सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में लिकर के बजाय फ्रूट वाइन बनाने की अनुमति दी थी। 

बीते रोज सोशल मीडिया पर देवप्रयाग क्षेत्र में शराब के बॉटलिंग प्लांट को अनुमति का मामला तूल पकड़ गया था। इस मुद्दे ने प्रदेश की सियासत को भी गर्मा दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मामले में भाजपा सरकार के साथ ही देवप्रयाग क्षेत्र के पूर्व विधायक व उनकी सरकार में काबीना मंत्री रहे मंत्री प्रसाद नैथानी को भी निशाने पर लिया था।

बीते रोज अपने फेसबुक अकाउंट में डाली गई पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी सरकार के दौरान नैथानी यह चेतावनी देते रहे कि अगर देवप्रयाग क्षेत्र में फ्रूटी बनाने का कारखाना लगा तो सरकार नहीं। पूर्व सीएम के तंज के बाद पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने देवप्रयाग क्षेत्र के तहसील मुख्यालय हिंडोलाखाल में आंदोलन की घोषणा कर दी। 

वहीं प्रदेश कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को हाथोंहाथ लेते हुए सरकार को घेरने का मन बनाया, लेकिन कुछ देर बाद ही कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा। दरअसल, देवप्रयाग क्षेत्र में शराब के उक्त बॉटलिंग प्लांट को पिछली कांग्रेस सरकार में ही मंजूरी मिली थी। इसके बाद कांग्रेस के तल्ख सुर ढीले पड़ते दिखाई दिए। 

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में फ्रूट वाइन और शराब की बॉटलिंग प्लांट लगाने का कंसेप्ट गलत नहीं है, लेकिन गंगा नदी के किनारे इस प्लांट को नहीं लगाया जाना चाहिए। 

सरकार के प्रतिनिधि की ओर से पिछली कांग्रेस सरकार में शराब के बॉटलिंग प्लांट को अनुमति दिए जाने की जानकारी पर फेसबुक पर अपनी पोस्ट में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हमने बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस दिया था, लेकिन शर्त ये थी कि पानी की या फ्रूटी या अधिकतम ऑयल की बॉटलिंग करने दी जाएगी। स्थानीय लोगों और हमारे विधायक के एतराज के बाद हमने उस प्रक्रिया को रोक दिया था। हमारे समय में केवल डिमार्केशन हुआ था, इन्वेस्टमेंट नहीं हुआ था। वर्तमान सरकार में इन्वेस्टमेंट हो गया। बॉटलिंग प्लांट की आड़ में व्हिस्की डिस्टल करने की अनुमति दी गई।  

पिछले माह से शुरू हुआ बॉटलिंग का काम

देवप्रयाग ब्लॉक के डडुवा भंडाली में शराब के बॉटलिंग प्लांट में काम करने की अनुमति वर्ष 2016 में साल दी थी और इसी वर्ष जून में प्लांट के लिए बॉटलिंग का लाइसेंस जारी किया था। इसके बाद यहां से पहली खेप बाजार में आई थी। स्थानीय लोग बॉटलिंग प्लांट का कड़ा विरोध कर रहे हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह बॉटलिंग प्लांट है। यहां शराब बनाई नहीं जा रही, बल्कि उसे बोतल में भरा जाता है।

प्रसिद्ध तीर्थस्थल देवप्रयाग की महत्ता व श्रद्धालुओं की गंगा व भगवान रघुनाथ के प्रति गहरी आस्था देखते हुए यहां मादक द्रव्यों की बिक्री तक की कल्पना नहीं होती थी। डडुवा भंडाली में वर्ष 2016 में कुछ लोगों ने बॉटलिंग प्लांट के प्रयास शुरू कर दिए। स्थानीय लोगों ने बताया कि शराब कारोबारियों ने ब्लॉक में मिनरल वाटर की फैक्ट्री खोलने के नाम पर भूमि की तलाश शुरू की। 

इसके बाद देवप्रयाग से लगभग 35 किलोमीटर दूर डडुवा भंडाली की भूमि को लेकर ग्रामीणों से सौदेबाजी शुरू की गई। शराब कारोबारियों ने यहां मिनरल वाटर की फैक्ट्री लगाने की बात कही, मगर जब उन्होंने पांच सौ नाली भूमि की जरूरत बताई तो कई ग्रामीणों ने इस बात पर संदेह जताया। 

क्षेत्र पंचायत सदस्य वेदप्रकाश बडोनी के अनुसार, उन्होंने ग्रामीणों को इस मामले में भूमि देने से पहले आगाह भी किया व भूमि की रजिस्ट्री न करने को कहा। इसके बाद भी शराब कारोबारियों ने गांव के कुछ लोगों को बरगलाकर पांच सौ नाली भूमि हथियाने की कोशिश शुरू कर दी। भूमि मिलने के बाद दिसंबर 2016 में यहां फैक्ट्री बनने की शुरुआत हुई। 

ग्रामीणों को तब तक मिनरल वाटर की फैक्ट्री यहां बनाए जाने की बात कही जाती रही। कारोबारियों ने ग्रामीणों को रोजगार देने की शर्त तो मानी, मगर इसमें भी जमकर शोषण किया। फैक्ट्री में डडुवा व उमरी गांव के करीब 35 लोगों को रोजगार दिया गया। इसमें करीब 18 महिलाएं शामिल थीं। सामाजिक कार्यकर्ता गणेश भट्ट के अनुसार, यहां काम करने वाले ग्रामीणों को बताया कि यहां की शराब को राज्य से बाहर बेचा जाएगा, लेकिन निकट के कस्बों में भी यह ब्रांड उपलब्ध हो रही है।

कुछ भी नहीं है आपत्तिजनक 

एसडीएम कीर्तिनगर अनुराधा पाल के अनुसार, डडुवा में शराब की बॉटङ्क्षलग की जाती है। यहां पर शराब बनाई नहीं जाती है। प्रशासन की टीम ने एक बार यहां निरीक्षण किया, जिसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। जल्द ही एक बार फिर से निरीक्षण किया जाएगा। 

वही, टिहरी की  जिला आबकारी अधिकारी रेखा भट्ट के मुताबिक, प्लांट को बॉटलिंग का लाइसेंस दिया है। इसके बाद वहां से पहली खेप निकल चुकी है। यहां पर सिर्फ बॉटलिंग की जा रही है। 

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Posted By: Bhanu

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