देहरादून, राज्य ब्यूरो। देवभूमि उत्तराखंड में अलकनंदा व भागीरथी के संगम स्थल देवप्रयाग के निकट शराब के बॉटलिंग प्लांट के मामले को लेकर सियासत गरमा गई है। सोशल मीडिया में इस बॉटलिंग प्लांट के देवप्रयाग के दिए गए पते और ब्रांड के नाम लेकर कई पोस्ट वायरल हो रही हैं। सोशल मीडिया में आने के बाद ही देवप्रयाग के निकट शराब बॉटलिंग प्लांट की जानकारी सार्वजनिक हुई, जिससे एकबारगी सब चौंक गए। मामला किस कदर तूल पकड़ गया, यह इससे समझा जा सकता है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक-दूसरे पर वार-पलटवार करने में देर नहीं लगाई।

हाल में सोशल मीडिया में शराब के एक नए ब्रांड का नाम व इसके बॉटलिंग प्लांट का पता तेजी से वायरल हुआ। इस प्लांट का पता देवप्रयाग के ददुवा गांव का दिया गया है। इसे सीधे देवभूमि व इसकी मान्यताओं से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। कहा जा रहा है कि अब अलकनंदा व भागीरथी के संगम स्थल पर, जहां पवित्र गंगाजल मिलता है, वहीं अब शराब की बॉटलिंग की जा रही है। इससे देवभूमि की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे आबकारी महकमे में भी हलचल मची है। 

विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रदेश में शराब की बॉटलिंग करने के लिए 24 दिसंबर 2012 को तत्कालीन विजय बहुगुणा सरकार में नीति बनाई गई। इसमें यह प्रावधान किया गया कि जो भी शराब कंपनी यह प्लांट स्थापित करना चाहेगी, वह बाजार में पांच वर्ष पूर्व आ चुकी होनी चाहिए। 

उस कंपनी के ब्रांड की कम से कम तीन राज्यों में बिक्री हो रही हो और पिछले तीन वर्षो में उसका उत्पादन कम से कम दो लाख पेटी प्रतिवर्ष हो। इसका मकसद यह बताया गया कि इससे बाजार में पहले से ही प्रचलित ब्रांड ही बॉटलिंग प्लांट लगा सकेंगे। साथ ही इनकी गुणवत्ता की पहले ही परख हो चुकी होगी। 

वर्ष 2016 में तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने इन नियमों में संशोधन किया। पहला संशोधन 17 अक्टूबर 2016 को लाया गया। इसमें पांच वर्ष पुरानी कंपनी, तीन राज्यों में ब्रांड की बिक्री और दो लाख पेटी प्रतिवर्ष के उत्पादन की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई। इसके बाद 23 नवंबर 2016 को एक और संशोधन लाया गया। इसमें सीधे शराब बनाने वाली कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई। 

इसके अलावा इन बॉटलिंग प्लांट में कंपनी को अपने ब्रांड के साथ ही अन्य कंपनियों के ब्रांड भरने की भी छूट दी गई। कैबिनेट में लिए गए इन दोनो निर्णयों पर हंगामा हुआ तो उस समय यह तर्क दिया कि यहां गंगाजल की बॉटलिंग व पैकेजिंग की जाएगी और इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा। 

हालांकि, मौजूदा समय में परिस्थितियां अब भिन्न नजर आ रही हैं। यहां शराब के एक नए ब्रांड की बॉटलिंग की जा रही है। इस पूरे प्रकरण पर सियासत गरमा गई है। 

कांग्रेस सरकार के समय का है प्रोजेक्ट 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट पिछली कांग्रेस सरकार के समय ही तय हो गया था। वर्तमान सरकार उसी पर आगे बढ़ी है। इसका विरोध बेवजह किसी मामले को तूल देने जैसा है। जो लोग विरोध कर रहे हैं, मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि इससे न केवल स्थानीय फलों के उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि सूबे के युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। हर मामले में विरोध करने की मानसिकता सही नहीं है।

फल व सब्जियों की खपत बढ़ाने को किया था नीति में बदलाव

पूर् मुख्यमंत्री हरीश रावत के अनुसार, मैने उत्तराखंडी फलों, सब्जियों आदि की खपत को बढ़ाने के लिए जब आबकारी नीति में परिवर्तन किया तो लोगों ने एक शराब का नाम लेकर आसमान सिर पर उठा लिया। उसमें 10 प्रतिशत फलों का रस ब्लेंड होता था, स्वाद उसका कुछ बदला-बदला सा था। फिर कुमाऊं व गढ़वाल में वाइनरी प्लांट लगाने को लाइसेंस दिए, तो लोग सड़कों पर उतर आए। ऊंचे लोगों के ख्याल ऊंचे होते हैं।

हरीश रावत के तंज पर नैथानी की जुबां पर आई पीड़ा

देवप्रयाग क्षेत्र से एनसीसी ट्रेनिंग एकेडमी हटाने और शराब का बॉटलिंग प्लांट लगाए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पूर्व काबीना मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी पर तंज कसा तो इस मामले को लेकर नैथानी की पीड़ा उनकी जुबां पर आ गई। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं से प्रेरित सरकार का यह रवैया असहनीय है। इसके विरोध में देवप्रयाग ब्लॉक मुख्यालय हिंडोलाखाल में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। 

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने फेसबुक अकाउंट में पोस्ट कर टिप्पणी की कि-एक उत्तराखंड के गृहस्थ बाबा हैं डबल मंत्री, मुझसे कहते थे कि एनसीसी एकेडमी नहीं तो सरकार नहीं। अगर देवप्रयाग क्षेत्र में फ्रूटी बनाने का कारखाना लगा तो सरकार नहीं। अब एनसीसी एकेडमी कख नैघो। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने देवप्रयाग क्षेत्र में शराब के एक ब्रांड के बॉटलिंग प्लांट को लेकर भी टिप्पणी की। प्रदेश में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान देवप्रयाग क्षेत्र में उक्त दोनों ही मुद्दों को लेकर मुखर रहे तत्कालीन काबीना मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तंज को लेकर भी मौजूदा भाजपा सरकार पर बरसे। रावत और नैथानी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। 

देवप्रयाग क्षेत्र के पूर्व विधायक व पिछले विधानसभा चुनाव में शिकस्त खा चुके मंत्री प्रसाद नैथानी ने पिछली सरकार में उनकी बात को तवज्जो देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का आभार जताया। साथ में उन्होंने कहा कि देवप्रयाग क्षेत्र के मालदा श्रीकोट में एनसीसी एकेडमी का शिलान्यास हो चुका है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उक्त एकेडमी को पौड़ी ले गए। उन्होंने यह कदम उठाने से पहले शिक्षा विभाग से पूछना मुनासिब नहीं समझा। बीती दो जुलाई को कीर्तिनगर में प्रदर्शन कर वह राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज चुके हैं। इस संबंध में उन्होंने मुख्य सचिव से भी बात की है।

गौरतलब है कि बीती 29 जून को त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने एनसीसी एकेडमी पौड़ी में सितोनस्यूं पट्टी के देवाल गांव में स्थापित करने और एकेडमी के 3.67 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण को मंजूरी दी है। पूर्व शिक्षा मंत्री नैथानी ने कहा कि देवप्रयाग क्षेत्र में शराब के बॉटलिंग प्लांट का स्थानीय जनता ने विरोध किया है। देवप्रयाग क्षेत्र को पिछली सरकार कुंभ क्षेत्र के दायरे में ला चुकी है। उक्त बॉटलिंग प्लांट का विरोध किया जाएगा। उक्त दोनों ही मुद्दों को लेकर हिंडोलाखाल में धरना-प्रदर्शन शुरू करने जा रहे हैं।

तो बॉटलिंग प्लांट में ही तैयार हो रहा ब्रांड

देवप्रयाग के नजदीक स्थित बॉटलिंग प्लांट के नाम से तो यह लगता है कि यहां केवल बोतलों में बनी-बनाई शराब भरी जा रही है, मगर ऐसा है नहीं। सूत्रों की मानें तो बॉटलिंग प्लांट में बाहर से तैयार स्प्रिट व शराब बनाने के अन्य तत्व लाए जाते हैं। यहीं इन्हें निर्धारित मात्रा में मिलाकर शराब बनाई जाती है। देवप्रयाग के निकट बॉटलिंग प्लांट में शराब बन रही है या नहीं, इसे लेकर असमंजस की स्थिति है। 

विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी शराब को अमूमन डिस्टलरी में तैयार किया जाता है। डिस्टलरी में उसमें शराब तैयार करने से लेकर बॉटलिंग तक की व्यवस्था होती है। वहीं, यदि सिर्फ बॉटलिंग प्लांट है तो रेक्टिफाइड स्प्रिट को बाहर से लाया जाता है और शेष काम ही बॉटलिंग प्लांट में किया जाता है। शराब विभिन्न तरीके से तैयार की जाती है। 

इसमें शीरे के साथ ही अनाज व फलों का भी उपयोग किया जा सकता है। जिस भी माध्यम से शराब बनाई जाती है तो उसे फरमेंटेशन (किण्वन) के लिए बड़ी-बड़ी टंकियों में भर दिया जाता है। इसके बाद ईस्ट डालकर आग में पकाया जाता है। इस प्रक्रिया में रेक्टिफाइड स्प्रिट तैयार हो जाती है, जिसकी तेजी या तीव्रता 90 से 95 के बीच रहती है। यदि देशी शराब बनानी है तो उसकी तीव्रता को 36 तक लाया जाता है और शेष हिस्सा पानी मिलाया जाता है। 

वहीं, अंग्रेजी शराब बनाने में तीव्रता को 42.8 तक लाया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद उसमें जरूरत के मुताबिक विभिन्न तरह के तत्व मिलाए जाते हैं और फिर बड़े टैंकों में शराब को 72 घंटे के लिए रख दिया जाता है। तय अवधि के बाद शराब को निकालकर बोतलों में भर दिया जाता है। पैकिंग व लेबलिंग करने के बाद बेचने के लिए बाहर भेजा जाता है। देवप्रयाग में भी ऐसा ही किया जा रहा है।

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Posted By: Bhanu

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