India China Border Issue: पूर्व सैन्य अधिकारी बोले, सीमा पर हो रहे निर्माण से बौखलाया चीन
सीमा विवाद का हल निकालने के लिए सैन्य स्तर पर हो रही बातचीत के बीच चीनी सेना की कार्रवाई से पूर्व सैनिकों में गुस्सा है। उन्होंने कहा कि अब चीन को उसी की भाषा में जवाब देना होगा।
देहरादून, जेएनएन। लद्दाख के गलवन क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत व चीन की सेना के बीच हुई हिंसक झड़प से हर कोई हतप्रभ है। सीमा विवाद का हल निकालने के लिए सैन्य स्तर पर हो रही बातचीत के बीच चीनी सेना की इस कार्रवाई से पूर्व सैनिकों में गुस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा सीमा तक बनाए जा रहे सड़क मार्ग, हवाई पट्टी व अन्य संरचनात्मक विकास से चीन बौखला गया है। अब चीन को उसी की भाषा में जवाब देना होगा।
चीन नहीं चाहता भारतीय फोज की आवाजाही हो आसान
रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल आनंद स्वरूप कहते हैं कि चीन नहीं चाहता है कि लद्दाख और सीमा तक भारतीय फौज की आवाजाही आसान हो। जबकि उसने खुद सीमा तक सभी सुविधाएं जुटा रखी हैं। वहीं, अब कोरोना के चलते विश्व का ध्यान भटकाने के लिए भी चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उकसावे की कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत उसकी किसी भी चाल में फंसने वाला नहीं है।
फोटोः रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल आनंद स्वरूप।
भारत पीछे हटा तो भविष्य में भुगतना पड़ेगा खामियाजा
रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल जीएस नेगी कहते हैं कि गलवन क्षेत्र में वर्ष 1962 से लेकर अब तक कोई विवाद नहीं था। लेकिन इस हरकत के बाद अब मिलिट्री लेवल की बातचीत का वक्त निकल गया है। केंद्र सरकार को इस पर कड़ा कदम उठाना चाहिए। यदि भारत पीछे हटा तो इसका खामियाजा भविष्य में भुगतान पड़ सकता है।
फोटोः रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल जीएस नेगी।
भारतीय सेना के जवाब से घबराया हुआ है चीन
रिटायर ब्रिगेडियर केजी बहल का कहना है कि सीमा विवाद का हल निकालने के लिए जारी बातचीत के बीच चीनी सेना ने जिस तरह का विश्वासघात किया है वह गलत है। इससे जाहिर होता है कि चीन भारतीय सेना की ओर से मिल रहे करारे जवाब से घबरा गया है। बौखलाहट में आकर वह हिंसक घटना तक को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहा है।
फोटोः रिटायर ब्रिगेडियर केजी बहल।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने धैर्य का परिचय दिया और गोली नहीं चलाई। पर चीनी सैनिकों ने कंटीली तार व पत्थर चलाकर हमारे सैनिकों पर हमला किया। कहते हैं कि जब से भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को वापस लेने की बात कही है तब से चीन और भी ज्यादा घबराया हुआ है। जबकि इससे उसका कोई लेना-देना नहीं है।
उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर भी अलर्ट
पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हुई हिंसक झड़प के बाद अब उत्तराखंड के सीमांत जिलों में भी अलर्ट जारी हो गया है। सूत्रों की मानें तो सीमांत क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला होने के कारण आधिकारिक रूप से सभी इस मसले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर रहे हैं।
उत्तराखंड भारत का सीमांत राज्य है। यहां का तकरीबन 350 किमी का इलाका चीन सीमा से लगा हुआ है। विशेषकर चमोली व उत्तरकाशी जिलों में कुछ चौकियां भी चीन सीमा के नजदीक बनी हुई हैं। बीते माह उत्तरकाशी के नेलांग में भी भारतीय व चीनी सैनिकों के बीच झड़प की खबरें सामने आई थीं, लेकिन इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई।
इसके अलावा चमोली के बाड़ाहोती में बीते वर्षो में चीनी सैनिकों की सीमा में हलचल देखी गई है। सूत्रों की मानें तो चीन के साथ भारत के बीच बढ़ते तनाव के बीच इन दोनों जिलों में अलर्ट जारी है। यहां की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर चौकसी भी बढ़ाई गई है। यहां तक कि गृह मंत्रलय भी उत्तराखंड शासन के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए है।
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सीएम ने शहीदों को किया नमन
लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर झड़प में शहीद हुए भारतीय सेना के जवानों को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नमन किया है। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी हमारी सेना दृढ़ विश्वास से देश की रक्षा में डटी है। पूरा देश सेना के साथ है।
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