देहरादून, [जेएनएन]: चुनावी दंगल में उतरे 'नेताजी' को या तो चुनावी खर्चे का लेखा-जोखा कैसे देना है, इसका पता नहीं है, या जानबूझ कर वह खर्च का हिसाब देने से बच रहे हैं। यह चुनावी लेखा-जोखा का निरीक्षण कर रही लेखा टीमों को समझ में नहीं आ रहा है। 

निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई है कि अधिकांश प्रत्याशियों ने अपने नामांकन फीस और जमानत राशि तक का जिक्र अपने चुनावी खर्चे में नहीं किया है। 

महापौर पद के प्रत्याशियों के खर्च ब्योरा का अगर आकलन करें तो किसी भी प्रत्याशी का अब तक का चुनावी खर्च 28 हजार से ऊपर नहीं पहुंच पाया है। सभी प्रत्याशियों ने चुनावी खर्च में अपने नामांकन की धनराशि 12 हजार भी शामिल की है। यानि नामांकन से लेकर अब तक महापौर का कोई प्रत्याशी दस-बारह हजार से ऊपर खर्च नहीं कर पाया है। यह बात लेखा टीमों के गले भी नहीं उतर रही है। इसलिए सभी प्रत्याशियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

पार्षद पद के लिए चुनावी रण में उतरे प्रत्याशियों का हाल तो गजब है। अधिकांश प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्होंने अपने नामांकन शुल्क को चुनावी खर्चे में नहीं दिखाया है। सौ वार्डों में उतरे 415 प्रत्याशियों में से अधिकांश प्रत्याशी ऐसे हैं, जिनका खर्च चार हजार से ऊपर नहीं गया है। 

कुछ प्रत्याशी ऐसे हैं जिन्होंने अपना चुनावी खर्च एक हजार से लेकर पंद्रह सौ रुपये तक दिखा रखा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर नेताजी का हाथ टाइट है या वह जानबूझ कर चुनावी खर्च दिखाने में कतरा रहे हैं।

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Posted By: Bhanu

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