Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सत्ता के गलियारे से : निजाम क्या बदला, बदल गए हरक के तेवर

    By Sunil NegiEdited By:
    Updated: Mon, 05 Apr 2021 10:31 AM (IST)

    हरक सिंह रावत वही जिन्हें पिछली सरकार में उसी विभाग के एक बोर्ड के अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ा जिसके वे मंत्री थे। तब तेवरों में काफी तल्खी झलकाई मगर उस वक्त के मुखियाजी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। निजाम बदला और बदल गई हरक की किस्मत।

    Hero Image
    कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत। जागरण आर्काइव

    विकास धूलिया, देहरादून। हरक सिंह रावत, वही, जिन्हें पिछली सरकार में उसी विभाग के एक बोर्ड के अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ा, जिसके वे मंत्री थे। सियासत चीज ही ऐसी है, रिश्तों का आंकड़ा कब छत्तीस हो जाए, कहा नहीं जा सकता। तब तेवरों में काफी तल्खी झलकाई, मगर उस वक्त के मुखियाजी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। वक्त बदला, निजाम बदला और बदल गई हरक की किस्मत। अभी महीना भी नहीं गुजरा है, लेकिन लगता है गब्बर चुन-चुन कर बदला ले रहा है। अपने इलाके की लंबे समय से अटकी-लटकी सड़क का आदेश करवाया और फिर उसी बोर्ड के 38 मुलाजिमों की बर्खास्तगी के फैसले को पलट डाला, जिससे उन्हें जबरन रुखसत किया गया था। यह आलम तो बदले निजाम के पहले ही महीने का है, अभी तो चुनाव में दस महीने का वक्त बाकी है। किसे पता हरक के नए तेवर आगे क्या और कितने गुल खिलाते हैं।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सल्ट के दंगल पर देवू भाई की नजर

    विधानसभा चुनाव से दस महीने पहले भाजपा और कांग्रेस अल्मोड़ा जिले की सल्ट सीट के उपचुनाव में एक-दूसरे को आंक रहे हैं। दोनों चिंतित हैं, हालांकि वजह अलहदा हैं। सत्तारूढ़ भाजपा नए मुखिया के साये तले पहली बार चुनाव में जा रही है, तो कांग्रेस में कई स्वयंभू मुखिया हैं, जो अकसर पार्टी के लिए इस तरह की चिंता का सबब बनते रहे हैं। प्रीतम संगठन के मुखिया और इंदिरा विधायक दल की, लेकिन एक मुखिया ऐसे भी हैं जो पूर्व होने के बावजूद फिलवक्त सबसे भारी हैं। सही पहचाना, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, जो इन दिनों कोरोना से जूझते हुए स्वास्थ्यलाभ कर रहे हैं। कैंडीडेट हरदा का पसंदीदा, इलाका उन्हीं का है, शेर पर सवा सेर तो पड़ेंगे ही। अब आलाकमान ने देवू भाई, यानी प्रभारी देवेंद्र यादव को सल्ट भेजा है, ताकि नजर रखें कि ये सब मुखिया मिलकर कहीं चुनाव में प्रत्याशी का रायता न फैला दें।

    नेताजी की बत्ती गुल, हसरतों का मीटर चालू

    सूबे में एक साथ 80 लालबत्ती गुल हो गईं। सत्ता में हिस्सेदारी का लुत्फ ले रहे भाजपा नेता एक झटके में पैदल हो गए। दरअसल, नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पिछली त्रिवेंद्र सरकार में विभिन्न निगमों, समितियों, परिषदों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य और सलाहकार पदों पर नियुक्त किए गए लगभग 120 महानुभावों की कुर्सी खिसका दी। इनमें से 80 को कैबिनेट या राज्य मंत्री का ओहदा, यानी लालबत्ती हासिल थी। विडंबना यह कि इनमें से लगभग डेढ़ दर्जन ऐसे हैं, जिनके हिस्से महज एक-डेढ़ महीने का ही मेहनताना आया, क्योंकि इनकी नियुक्ति हाल ही में हुई थी। हालांकि इन 80 में से काफी ऐसे भी हैं, जिनकी सियासी हसरतों का मीटर अब भी बाकायदा चालू है कि क्या मालूम, मुखियाजी जो नई लिस्ट तैयार कर रहे हैं, उसमें उनका भी नाम हो। आखिर आठ-दस महीने बाद चुनाव आचार संहिता लागू होने तक सरकारी खर्चापानी का जुगाड़ जो जरूरी है।

    इतना कुछ पलट गया, पलटवार को बचा क्या

    भाजपा आलाकमान ने विधानसभा चुनाव से सालभर पहले नेता क्या बदला, त्रिवेंद्र छोड़ि‍ए, कांग्रेस तक के अरमानों पर घड़ों पानी फिर गया। त्रिवेंद्र सरकार के चार साल के कामकाज और फैसलों को लेकर जो स्ट्रेटजी तैयार की थी, ऐन मौके पर धड़ाम हो गई। एंटी इनकंबेंसी फैक्टर अलग से बेमायने होकर रह गया। फिर भी सत्ता में वापसी की आस लिए कांग्रेस को कुछ उम्मीदें थीं, मगर नए नेता तीरथ के रुख को देखते हुए तो अब ये भी धूमिल होने लगी हैं। तीरथ तीन हफ्तों में ही त्रिवेंद्र के इतने फैसले पलट चुके कि कांग्रेस के पास चुनाव के वक्त पलटवार करने को मुद्दों का अकाल पड़ने के आसार नजर आ रहे हैं। कांग्रेस खेमे की खबर है कि सूबाई मुखिया प्रीतम और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा सिर जोड़कर चर्चा कर रहे हैं कि अब समझ आया कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत क्यों त्रिवेंद्र की तारीफ करते अघाते नहीं थे।

    यह भी पढ़ें-बंगाल में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करेंगे महाराज

    Uttarakhand Flood Disaster: चमोली हादसे से संबंधित सभी सामग्री पढ़ने के लिए क्लिक करें