देहरादून, जेएनएन। बिल्डर लोगों से मोटी रकम लेने के बाद भी न तो उन्हें समय पर फ्लैट दे रहे हैं और न ही उनकी धनराशि वापस लौटा रहे हैं। जब रेरा आदेश जारी कर रहा है तो उसका भी अनुपालन नहीं किया जा रहा। ऐसे ही एक मामले में रेरा ने पनाश हाइट्स परियोजना का निर्माण कर रहे एबीएल प्रोजेक्ट्स पर आदेश की नाफरमानी पर 20 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई है। साथ ही निवेशक की राशि 10.75 फीसद ब्याज सहित लौटाने के आदेश भी दिए हैं। 

श्याम सिंह और विजय चौहान ने एबीएल प्रोजेक्ट्स की सहस्रधारा रोड स्थित चालंग गांव में पनाश हाइट्स परियोजना में 15 मई 2016 में 80 लाख रुपये का फ्लैट बुक कराया था। समझौते के अनुसार 31 जुलाई 2017 तक फ्लैट पर कब्जा दिया जाना था। तय सीमा तक कब्जा तो नहीं दिया गया, मगर तब तक 66.88 लाख रुपये बिल्डर को दिए जा चुके थे। इसके बाद भी जब फ्लैट नहीं मिला तो निवेशकों ने अपनी धनराशि वापस मांगी और जब राशि नहीं मिली तो उन्होंने उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में शिकायत दर्ज कराई। 

प्रकरण पर सुनवाई करते हुए रेरा अध्यक्ष विष्णु कुमार ने बिल्डर को 15 जनवरी 2019 को आदेश दिए कि वह निवेशकों को 10.75 फीसद की दर से ब्याज सहित राशि को 45 दिन के भीतर लौटा दे। इसके बाद भी जब रकम नहीं लौटाई गई तो निवेशकों ने दोबारा रेरा का दरवाजा खटखटाया। इसकी सुनवाई में रेरा ने जून में कारण बताओ नोटिस जारी किया कि क्यों न उन पर 50 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से पेनाल्टी लगा दी जाए। 

बिल्डर ने जवाब दिया कि उन्होंने अपनी समस्त पूंजी परियोजना के निर्माण में लगा दी है और उन्हें 45 दिन का और समय दिया जाए। इस बीच बिल्डर ने सिर्फ 15 लाख रुपये ही लौटाए और बिल्डर की राशि न लौटाने की प्रवृत्ति को देखते हुए रेरा ने 20 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाते हुए आदेश दिए कि पेनाल्टी की राशि और निवेशकों की शेष राशि को निर्धारित ब्याज समेत 15 जुलाई तक अदा कर दिया जाए। अन्यथा इसकी वसूली भू-राजस्व के एरियर के रूप में कर ली जाएगी। 

बिल्डरों को भेजे नोटिस के 128 लिफाफे बैरंग लौटे 

रेरा में पंजीकरण न कराने वाले बिल्डरों को भेजे गए 190 नोटिस में से 128 के लिफाफे बैरंग लौट आए हैं। इससे बिल्डरों पर शिकंजा कसने की रेरा की मंशा को एक बार फिर झटका लगा है। हालांकि, रेरा ने ऐसे बिल्डरों की जांच कराकर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। रेरा अध्यक्ष विष्णु कुमार ने बताया कि मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) और अन्य विकास प्राधिकरणों से बड़ी परियोजनाओं का नक्शा पास कराने वाले बिल्डरों की जानकारी मांगी गई थी। इसके आधार पर पता चला था कि 190 बिल्डरों ने नक्शा पास कराने के बाद भी रेरा में पंजीकरण नहीं कराया।

इसको लेकर जनवरी 2018 में इन सभी को पहली बार नोटिस भेजे गए थे। काफी समय बाद भी जब इनका जवाब नहीं आया तो हाल ही में मई 2019 में इन्हें दोबारा नोटिस जारी किए गए। भेजे गए नोटिस के क्रम में 30 के जवाब मिल गए हैं और इनका परीक्षण कराया जा रहा है। 

वहीं, दूसरी तरफ 128 बिल्डरों के नोटिस के लिफाफे बैरंग लौट आए हैं। यह बेहद आश्चर्य की बात है। अब हर एक लिफाफे के वापसी के कारणों की पड़ताल की जाएगी। देखा जाएगा कि जानबूझकर नोटिस लेने से इन्कार किया गया है कि या फिर नक्शा पास करते समय गलत पतों का उल्लेख किया गया था। ऐसे हर एक प्रकरण की जांच कराई जाएगी और फिर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। 

32 के खिलाफ त्वरित कार्रवाई होगी 

रेरा अध्यक्ष विष्णु कुमार ने बताया कि जिन 32 बिल्डरों ने नोटिस प्राप्त करने के बाद भी जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई शुरू की जाएगी। यदि जल्द इनकी तरफ से जवाब नहीं मिलते हैं तो एमडीडीए और संबंधित विकास प्राधिकरणों से इनके नक्शे निरस्त करने को लेकर पत्र भेजा जाएगा। बिल्डरों से वसूली की तैयारी तेज रेरा ने उन बिल्डरों के खिलाफ भू-राजस्व अधिनियम के तहत वसूली की कार्रवाई तेज कर दी है, जो न तो निवेशकों की राशि लौटा रहे हैं, न ही पेनाल्टी भर रहे हैं। अब तक ऐसे एक दर्जन से अधिक बिल्डरों से वसूली के लिए संबंधित जिलाधिकारियों को पत्र भेजे जा चुके हैं और जल्द एक दर्जन और बिल्डरों पर यह कार्रवाई की जाएगी। 

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Posted By: Raksha Panthari

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