देहरादून, जेएनएन। सरकारी अस्पतालों सहित निजी मेडिकल स्टोरों में एंटी रैबीज वैक्सीन खत्म होने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। पिछले डेढ़ माह से सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन की कमी बनी हुई है। उस पर स्वास्थ्य विभाग के पास जो थोड़ा बहुत स्टॉक था, वह भी अब निपट गया है। बाजार में वैक्सीन मिल नहीं रही है। ऐसे में किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले तो वैक्सीन के लाले पड़ जाएंगे। 

एंटी रैबीज वैक्सीन को लेकर राज्य सरकार से लेकर केंद्र तक की बड़ी खामी सामने आई है। पिछले करीब डेढ़ से दो माह से एंटी रैबीज वैक्सीन की किल्लत बनी हुई है। प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के अधिकांश हिस्सों में यही हालात हैं। पर ताज्जुब देखिए कि सरकारें इस समस्या का समाधान नहीं तलाश पा रही हैं। अधिकारी यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं कि कंपनी वैक्सीन की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। तुर्रा यह कि मुख्य चिकित्साधिकारियों को यह अधिकार है कि तात्कालिक जरूरत के लिए वह 50 हजार रुपये की खरीद कर सकते हैं। पर वह वैक्सीन खरीदेंगे कहां से, इसका जवाब अधिकारी भी नहीं दे पा रहे हैं। कारण यह कि वैक्सीन बाजार तक में उपलब्ध नहीं है। कैमिस्ट बताते हैं कि एंटी रैबीज वैक्सीन बनाने वाली कंपनी इसे अधिक मुनाफे की लालच में एक्सपोर्ट कर रही है। जिस पर सरकार को लगाम लगानी चाहिए। यह तय किया जाए की पहले यहां की जरूरत पूरी हो, उसकेबाद बची वैक्सीन एक्सपोर्ट की जाए।

क्यों हुई समस्या 

अभी तक तीन कंपनियां वैक्सीन का उत्पादन करती थीं। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के निरीक्षण में इनमें दो में उत्पादन मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। ऐसे में इनका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। अब केवल एक कंपनी वैक्सीन बना रही है। पर यह अकेले डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं दे पा रही है।बाजार का हाल 

कैमिस्ट एसोसिएशन महानगर, देहरादून केपूर्व अध्यक्ष टीएस अग्रवाल का कहना है कि एंटी रैबीज वैक्सीन की किल्लत बनी हुई है। पिछले काफी वक्त से वैक्सीन की सप्लाई नहीं आ रही। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। किसी के पास अगर वैक्सीन बची हुई है, तो काम चल पा रहा है।

विभाग की परेशानी 

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रविंद्र थपलियाल के अनुसार पिछले तीन माह से वैक्सीन की आपूर्ति नहीं हुई है। कंपनी इसकी आपूर्ति नहीं कर पा रही है। उनका कहना है कि सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह बाहर से भी वैक्सीन खरीद सकते हैं। उन्हें तात्कालिक जरूरत के लिए 50 हजार रुपये तक की खरीद का अधिकार है।

बिना वैक्सीन जान सांसत में 

किसी भी व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया है तो उसके लिए जरूरी है कि वह 72 घंटे के अंतराल में एंटी रैबीज वैक्सीन अवश्य ही लगवा ले। इंजेक्शन नहीं लगवाने पर व्यक्ति रैबीज की चपेट में आ सकता है। वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल आर्य के अनुसार, पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद व पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है। पांचवां इंजेक्शन चिकित्सक की सलाह से ही लगाया जाता है। बाजार में एक वाइल की कीमत 330 रुपये होने के चलते गरीब तबका इसे खरीद पाने में असमर्थ है। ऐसे में ज्यादातर लोग सरकारी अस्पताल में ही इंजेक्शन लगाने आते हैं। कोर्स बीच में छोड़ देने पर बीमारी का खतरा बना रहता है।

कुत्ता काटे तो भगवान ही मालिक 

  • दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय की ही बात करें, तो यहां हर दिन डॉग बाइट के 50-60 मरीज पहुंच रहे हैं। नए-पुराने मरीज मिलाकर यह संख्या 150 तक पहुंच जाती है। लेकिन उन्हें वैक्सीन नहीं लग पा रही है।
  • प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों की कमोबेश यही स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एंटी रैबीज वैक्सीन की प्रदेश में हर साल तकरीबन 20 हजार वाइल की खपत है। पर पिछले तीन माह से वैक्सीन की आपूर्ति नहीं हुई है। बताया गया कि वैक्सीन का बचा स्टॉक भी समाप्त हो चुका है।
  • बाजार में भी वैक्सीन नहीं मिल रही है। किसी भी निजी अस्पताल व डिस्पेंसरी में वैक्सीन नहीं है। न ही दवा की दुकानों पर ही वैक्सीन का स्टॉक उपलब्ध है, जिसके चलते डॉग बाइट के शिकार लोगों की जान सांसत में है। 

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में अब टीकाकरण में शामिल होगी रोटा वायरस वैक्सीन

यह भी पढ़ें: अब गर्भवती महिला और बच्चे को लगेगा टीडी का टीका, जानिए इसके बारे में

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस