देहरादून, [जेएनएन]: हाई कोर्ट के आदेश के बाद शहर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बल्लूपूर से प्रेमनगर और सिल्वर सिटी से राजपुर की तरफ प्रशासन का ध्वस्तीकरण कार्य चलना था। लेकिन, बारिश की वजह से प्रशासन ने कार्रवाई स्थगित कर दी। हालांकि प्रेमनगर समेत शहर के कई जगहों पर 293 अतिक्रमण चिह्नित किए गए। 

अभी तक शहर में कुल 3412 अतिक्रमण चिह्नित किए जा चुके हैं। उधर, पंजाबी मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष सोमप्रकाश चौहान ने जिला प्रशासन को पलटन बाजार से खोखे हटाने में असमर्थ बताया है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने पलटन बाजार में अतिक्रमण चिह्नित कर लाल निशान लगाए हैं। लेकिन, कुछ खोखों को छोड़ दिया गया है, जबकि वो भी अतिक्रमण की जद में आ रहे हैं। 

प्रेमनगर चौक की सभी दुकान और मकान अतिक्रमण में 

प्रेमनगर चौक पर अतिक्रमण हटाओ टास्क फोर्स ने अतिक्रमण को चिह्नित कर लाल निशान लगाए। चौक स्थित सभी दुकानें पांच से सात मीटर तक अतिक्रमण की जद में आई हैं। प्रेमनगर चौक से चकराता की ओर जाने वाली सड़क के दोनों ओर की दुकान व मकानों पर 12.90 मीटर तक अतिक्रमण के निशान लगाए गए हैं। 

इसी रोड पर आगे चलकर 17.50 मीटर तक अतिक्रमण चिह्नित किया गया है। जिसकी जद में नई मिट्ठीबेहड़ी बस्ती के घर भी आ रहे हैं। वहीं प्रेमनगर चौक पर होटल मैग्नेट, शराब का ठेका समेत अन्य दुकानें भी अतिक्रमण की जद में आ रही हैं। 

चिह्नीकरण को लेकर धरने पर बैठे व्यापारी

प्रेमनगर में चिह्नीकरण व सीमांकन का कार्य किया गया। जिसके विरोध में प्रेमनगर व्यापारी मंडल के पदाधिकारी प्रेमनगर चौक स्थित आर्य समाज मंदिर के बाहर शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए। व्यापारी मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भूषण भाटिया का कहना है कि हम हाई कोर्ट के आदेश का विरोध नहीं कर रहे हैं। लेकिन, प्रशासन अपनी मनमानी कर चिह्नीकरण कर रहा है, जिसके लिए हम शांतिपूर्वक धरने पर बैठे हैं। इसी क्रम में व्यापारी मंडल ने एमडीडीए के उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव से मुलाकात की। व्यापारियों के मुताबिक आशीष श्रीवास्तव ने संज्ञान लेकर चिह्नीकरण की जांच गुरुवार को कराने की बात कही है। 

नक्शे की स्थिति स्पष्ट नहीं 

व्यापारी एवं भाजपा नेता पुनीत मित्तल के मुताबिक पलटन बाजार में नक्शे की स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासन नक्शे को सार्वजनिक नहीं कर रहा है और अनाप-सनाप सीमांकन कर व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। प्रशासन 1938 के नक्शे के आधार पर कार्रवाई की बात कर रहा है, जबकि 1938 में मीटर पैमाना होता ही नहीं था। उस दौरान यार्ड पैमाना होता था, ऐसे में हमारी मुख्यमंत्री से मांग है कि सही पैमाने से कार्रवाई की जाए ताकि व्यापारियों का उत्पीड़न न हो। 

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