मेहताब आलम, हरिद्वार : Ankita Murder Case : उत्तराखंड में पांच साल के भीतर तीन मुख्यमंत्री बदले, लेकिन अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुख्य आरोपित पुलकित आर्या के परिवार पर सरकारों की कृपा बनी रही। आर्या परिवार पर मेहरबानी इस तरह बरसी कि पांच साल में बाप और बेटा दोनों दायित्वदारी मंत्री बन गए।

दो-दो बार दायित्वदारी रहे विनोद आर्या के भाजपा में रहते हुए सरकारों और संगठन में मजबूत पकड़ जगजाहिर है, लेकिन अंकित आर्या को दायित्वधारी की कुर्सी आखिर किस काम के बदले इनाम में मिली? अब यह सवाल भी उठ रहा है कि कुर्सियों का रास्ता कहीं पुलकित के वनन्‍तरा रिसॉर्ट से होकर भी तो नहीं गुजरा।

पहली बार 2012 में विनोद आर्या को मिला दायित्‍व

  • कई दशक से भाजपा और आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़े डा. विनोद आर्या को पहली बार 2012 में माटी कला बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाकर दायित्वधारी की कुर्सी दी गई।
  • इससे न सिर्फ डा. विनोद आर्या की गिनती जिले के बड़े भाजपा नेताओं में होने लगी, बल्कि उनकी स्वदेशी आयुर्वेद फार्मेसी ने भी इसके बाद ही नाम और दाम दोनों हासिल किए। साथ ही पार्टी के बड़े मंचों पर विनोद आर्या नजर आने लगे।
  • साल 2017 में दोबारा भाजपा सरकार बनने पर फिर से डा. विनोद आर्या के अच्छे दिन शुरू हो गए।
  • इस बार त्रिवेंद्र रावत सरकार में उन्हें पशुपालन बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाकर फिर से दायित्वदारी की कुर्सी सौंपी गई।
  • प्रदेश में तीन मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद आर्या परिवार की पकड़ सरकार में बनी रही। जनवरी 2022 में विनोद आर्या के बड़े बेटे अंकित को दायित्वधारी की कुर्सी दी गई।

क्‍या दो-दो कुर्सियां दिलाने में रिसॉर्ट की भी अहम भूमिका?

अंकिता हत्याकांड के बाद पुलकित आर्या का वनन्‍तरा रिसॉर्ट आक्रोशित प्रदेशवासियों के निशाने पर है। चूंकि, इसी रिसॉर्ट में अंकिता की हत्या के कई राज दफन हैं और अभी तक हुई पड़ताल में यह साफ हो चुका है कि पुलकित ने कई बार अंकिता पर रिसॉर्ट में आने वालों को स्पेशल सर्विस देने का दबाव बनाया।

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ऐसे में चर्चाएं बनी हुई हैं कि बीते पांच साल में परिवार को दायित्वधारी की दो-दो कुर्सियां दिलाने में रिसॉर्ट की भी अहम भूमिका रही है। इसके साथ ही रिसॉर्ट पर आने-जाने वाले वीआइपी मेहमानों की जांच की मांग भी उठ रही है। लोग इंटरनेट मीडिया पर भी दायित्वधारी की कुर्सियों के रिसॉर्ट कनेक्शन को लेकर सवाल पूछ रहे हैं।

Edited By: Nirmala Bohra

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