देहरादून, सुमन सेमवाल। अमेरिकी नागरिक जॉनाथन हंटर कोरोना से संक्रमित होने के बाद अब स्वस्थ हैं। उनकी लगातार दो रिपोर्ट निगेटिव आई हैं। 22 दिन चली जंग के बाद उन्होंने कोरोना को मात दे दी। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किए गए जॉनाथन को जल्द डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। फिर वह अपने वतन अमेरिका लौट सकेंगे और उनके साथ जाएंगी सुखद यादें, जिन्हें वह कभी भूल नहीं पाएंगे। जॉनाथन को दून अस्पताल के डॉक्टर, नर्स व तमाम चिकित्सा कर्मी अब परिवार के सदस्यों की तरह लगने लगे हैं। दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में जॉनाथन ने बताया कि जिन लोगों से वह पहले कभी नहीं मिले, उनका समर्पण अमूल्य रहा। इन्हीं की सेवा की बदौलत कोरोना जैसी महामारी से लड़ने की ताकत मिली।

अमेरिकी नागरिक जॉनाथन हंटर 11 मार्च को दिल्ली पहुंचे थे और फिर वहां से 15 मार्च को देहरादून आए। इस बीच वह दून में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एजेंसी (आइटीडीए) भी काम के सिलसिले में गए थे। राजपुर रोड स्थित सरोवर पोर्टिको होटल में ठहरे जॉनाथन में कोरोना के लक्षण पाए जाने पर उन्हें 21 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया था। 23 मार्च को पता चला कि वह कोरोना से संक्रमित हैं।

जॉनाथन बताते हैं कि एक नर्स जिसका वह नाम भी नहीं जानते, उस पर किसी बात के लिए खीजना आसान था, मगर उसकी मुस्कराती आंखें हमेशा बयां करती थीं कि सेवा ही धर्म है। उन्होंने महसूस किया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी शिद्दत के साथ लॉकडाउन का पालन करा रहे हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटे हैं। इसी के अनुरूप यहां उनका उपचार करने वाली डॉ. रीता शर्मा में भी कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने का जज्बा दिखा। 

जॉनाथन कहते हैं कि कोरोना वायरस नस्ल, धर्म, लिंग और उम्र नहीं देखता। इसका सीधा संबंध शारीरिक दूरी के नियमों से है। अच्छी बात है कि भारत में लोग नियमों का समुचित पालन कर रहे हैं। भारत जीत रहा है और वायरस हार रहा है। अंत में वह कहते हैं कि ईस्टर की सभी को शुभकामनाएं और देखभाल के लिए फिर से धन्यवाद।

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याद रहेंगे अस्पताल में मिले तीन अमीगोज

जब जॉनाथन कोरोना से जंग लड़ रहे थे, तब आइसोलेशन वार्ड में कोरोना संक्रमित तीन प्रशिक्षु आइएफएस अधिकारियों का भी उपचार चल रहा था। वह बताते हैं कि तीनों बेहद जिंदादिल व्यक्ति हैं, जिन्हें वह थ्री अमीगोज (तीन दोस्त) कहकर बुलाते हैं। उपचार के दौरान प्रशिक्षु आइएफएस अधिकारियों के साथ देश-दुनिया के हालात पर चर्चा होती थी। सभी लोग बीमार थे, मगर किसी ने भी मुस्कान को होठों से दूर नहीं होने दिया। यही कारण है कि सभी में कोरोना वायरस की रोकथाम इतनी जल्द संभव हो पाई।

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