108 कर्मियों की गुहार, बकाया वेतन दिला दो सरकार
आपातकालीन सेवा 108 के पूर्व कर्मचारियों की न केवल नौकरी छिन गई बल्कि बकाया वेतन भी उन्हें अब तक नहीं मिला है। ऐसे में वे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
देहरादून, जेएनएन। आपातकालीन सेवा 108 के पूर्व कर्मचारियों की न केवल नौकरी छिन गई, बल्कि बकाया वेतन भी उन्हें अब तक नहीं मिला है। ऐसे में वे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र प्रेषित कर पुरानी कंपनी जीवीके इएमआरआइ से दो माह का बकाया वेतन और भत्ते दिलाने की माग की है। ऐसा न होने पर उन्होंने कंपनी के कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी।
इधर, नई कंपनी में समायोजन की माग को लेकर उनका क्रमिक अनशन जारी रहा। अनशन पर हर जिले से एक-एक कर्मचारी बैठा। जीवीके इएमआरआइ से सेवा समाप्त होने के बाद बेरोजगार हुए 717 कर्मचारी पिछले दस दिन से परेड मैदान पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें कई राजनीतिक पार्टियों व संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
108 और केकेएस कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव विपिन जमलोकी ने कहा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग उनके और उनके परिवारों के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोच रहे हैं। जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि जीवीके इएमआरआइ कंपनी पर उनका दो माह का वेतन और भत्ते बकाया हैं।
कई बार पत्राचार के बाद भी उन्हें भुगतान नहीं किया गया। ऐसे में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर भुगतान कराने की माग की गई है। ऐसा न होने पर उन्होंने कंपनी के खिलाफ भी आदोलन करने की चेतावनी दी है।
धरना देने वालों में नीरज शर्मा, रचना, सुशीला, आशा, शिशुपाल, रमेश डंगवाल, महेश जोशी, अनिल रावत, प्रियंका, आशना, दिव्या, आशीष, प्रवीण, राज मोहन सिंह आदि शामिल थे।
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